मंगलसूत्र विवाद पर विभाग ने दी सफाई:, डीपीओ ने माना मंगलसूत्र की गुणवक्ता खराब होने पर सप्लायर का एक हजार काट बची राशि वधुओं के खाते में जमा, भाजपा बोली जांच जारी, दोषियों पर होगी कार्यवाही

मनेन्द्रगढ़। एमसीबी जिले के खड़गवां विकासखंड अंतर्गत चनवारीडाँड़ में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत वितरित मंगलसूत्र को लेकर विवाद उठा था। इस पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है।जिला कार्यक्रम अधिकारी आदित्य शर्मा ने बताया कि योजना के संचालन में कोई अनियमितता नहीं हुई है। सभी भुगतान शासन के निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप किए गए हैं।शर्मा ने स्पष्ट किया कि विवादित मंगलसूत्र चांदी का नहीं था। इसके लिए केवल 989 रुपये का भुगतान किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि योजना के तहत वधु के खाते में निर्धारित 35 हजार रुपये के बजाय 36 हजार रुपये की राशि हस्तांतरित की गई है। मंगलसूत्र मद में बची हुई लगभग एक हजार रुपये की राशि भी सीधे लाभार्थी के खाते में जमा की गई है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत प्रति विवाह कुल 50 हजार रुपये खर्च करने का प्रावधान है। इसमें 35 हजार रुपये आरटीजीएस के माध्यम से वधु के खाते में, 8 हजार रुपये विवाह कार्यक्रम के आयोजन पर और 7 हजार रुपये आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने पर खर्च किए जाते हैं।

इस बीच, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता उज्जवल दीपक ने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच अभी जारी है। क्षेत्रीय विधायक एवं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जांच के आदेश दिए हैं।उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार का भ्रष्टाचार या अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारी या दोषी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

वहीं, विपक्ष इस मामले को लेकर मुखर है। कांग्रेस के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कहा कि अगर जिला स्तरीय जांच नहीं होगी, तो विभाग के सचिव से इसकी शिकायत की जाएगी। मंगलसूत्र वितरण को लेकर उठे विवाद के बीच विभाग की सफाई सामने आने के बाद अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

