55% दिव्यांगता के बावजूद 16 हजार किमी का सफर, तिरंगा लेकर साइकिल से दे रहे ‘Stop Pollution Save Earth’ का संदेश पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ देश भ्रमण पर निकले वासु राइडर, युवाओं को कर रहे प्रदूषण के प्रति जागरूक
16 हजार किमी साइकिल यात्रा, तिरंगे के साथ पर्यावरण बचाने का संदेश

16 हजार किलोमीटर की साइकिल यात्रा कर रहे वासु राइडर, ‘Stop Pollution Save Earth’ का दे रहे संदेश
55 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद नहीं रुके कदम, 2 जून 2025 से शुरू की यात्रा; स्कूलों, कॉलेजों और पुलिस विभाग के माध्यम से युवाओं को कर रहे जागरूक
बलरामपुर/रामानुजगंज। पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और मानवीय मूल्यों के प्रचार-प्रसार का संदेश लेकर उत्तर प्रदेश के आगरा निवासी वासु राइडर हजारों किलोमीटर की साइकिल यात्रा पर निकले हैं। 2 जून 2025 को शुरू हुई उनकी यह यात्रा अब तक करीब 16 हजार किलोमीटर का सफर तय कर चुकी है। हाथ और पैर से 55 प्रतिशत दिव्यांग होने के बावजूद वासु राइडर का हौसला लगातार कायम है और वे साइकिल के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचकर लोगों, खासकर बच्चों और युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
वासु राइडर पुत्र दिनेश कुमार, निवासी दुर्गापुर, राजपुर चुंगी, जनपद आगरा, उत्तर प्रदेश के स्थायी निवासी हैं। वे तिरंगे झंडे के साथ निःस्वार्थ भाव से यह यात्रा कर रहे हैं। उनकी यात्रा वर्ष 2028 में समाप्त होने की संभावना है। यात्रा का मुख्य उद्देश्य “Stop Pollution Save Earth” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना और लोगों को प्रदूषण कम करने के लिए अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करने के लिए प्रेरित करना है।


छोटी दूरी के लिए पेट्रोल-डीजल वाहनों के इस्तेमाल को लेकर युवाओं को कर रहे जागरूक
वासु राइडर का कहना है कि वर्तमान समय में प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुका है। खासकर युवा पीढ़ी छोटी-छोटी दूरी तय करने के लिए भी पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों का इस्तेमाल करती है। इससे ईंधन की खपत के साथ-साथ वायु प्रदूषण भी बढ़ता है।
इसी सोच के साथ उन्होंने साइकिल को अपने अभियान का माध्यम बनाया है। उनका संदेश है कि जहां संभव हो, लोग छोटी दूरी के लिए साइकिल या पैदल चलने को प्राथमिकता दें। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने में भी मदद मिलेगी।
वे युवाओं से अपील कर रहे हैं कि पर्यावरण संरक्षण को केवल भाषण या अभियान तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।
राजस्थान से नेपाल तक पहुंचा अभियान
वासु राइडर की साइकिल यात्रा कई राज्यों और क्षेत्रों से होकर गुजर चुकी है। अब तक वे राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और नेपाल सहित विभिन्न क्षेत्रों में यात्रा कर चुके हैं।
उत्तर प्रदेश में उन्होंने सभी 75 जिलों तक पहुंचकर अपने अभियान का संदेश लोगों तक पहुंचाया। यात्रा के दौरान उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और आम लोगों से मुलाकात कर पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर चर्चा की।

465 से अधिक स्कूलों में विद्यार्थियों को किया संबोधित
उत्तर प्रदेश की यात्रा के दौरान वासु राइडर ने करीब 65 दिनों में 465 से अधिक स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को संबोधित किया। स्कूलों में उन्होंने बच्चों से पर्यावरण, प्रदूषण, ईंधन की बचत और साइकिल के उपयोग को लेकर संवाद किया।
उनका प्रयास रहता है कि बच्चों और युवाओं को केवल प्रदूषण के नुकसान के बारे में जानकारी न दी जाए, बल्कि उन्हें यह भी बताया जाए कि वे अपने स्तर पर पर्यावरण संरक्षण में क्या भूमिका निभा सकते हैं।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश के करीब 15 जिलों में पुलिस विभाग को भी अपने अभियान के बारे में जानकारी देकर अधिकारियों और पुलिस कर्मियों को संबोधित किया है। विभिन्न स्थानों पर उन्हें स्थानीय लोगों और प्रशासन का सहयोग भी मिला।

प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम की मांग
वासु राइडर अपनी यात्रा के दौरान प्रत्येक जिले में प्रशासनिक अधिकारियों से मिलने का प्रयास कर रहे हैं। वे जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम, तहसीलदार और अन्य संबंधित अधिकारियों को अपने अभियान के बारे में जानकारी देकर सहयोग का अनुरोध करते हैं।
उनका कहना है कि यदि प्रशासन का सहयोग मिले तो स्कूलों और कॉलेजों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाया जा सकता है।
इसी उद्देश्य को लेकर रामानुजगंज से निकलकर वे बलरामपुर जिला मुख्यालय की ओर रवाना हुए हैं। बलरामपुर पहुंचकर वे जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे तथा उन्हें अपने अभियान की जानकारी देते हुए आवेदन भी सौंपेंगे। वे अधिकारियों से स्कूल-कॉलेजों में विद्यार्थियों को संबोधित करने के लिए आवश्यक सहयोग और अनुमति का अनुरोध करेंगे।
जगह-जगह हो रहा भव्य स्वागत
हजारों किलोमीटर की यात्रा के दौरान वासु राइडर को विभिन्न स्थानों पर लोगों का सहयोग और सम्मान मिल रहा है। कई जगह स्थानीय लोग उनसे मुलाकात कर उनके अभियान के बारे में जानकारी लेते हैं और उन्हें आगे की यात्रा के लिए शुभकामनाएं देते हैं।
विशेष रूप से सेन समाज से जुड़े होने के कारण विभिन्न स्थानों पर सेन समाज के लोगों द्वारा उनका आत्मीय और भव्य स्वागत किया जा रहा है। समाज के लोग वासु राइडर द्वारा किए जा रहे पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के कार्यों की सराहना कर रहे हैं।
सेन समाज के लोगों का कहना है कि 55 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद वासु राइडर जिस तरह हजारों किलोमीटर की साइकिल यात्रा कर रहे हैं और समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं, वह लोगों को जागरूक करने वाला प्रयास है। समाज के लोग जगह-जगह उनका स्वागत कर उनका उत्साहवर्धन कर रहे हैं और अभियान की सफलता के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं।
तिरंगा बना यात्रा की पहचान
वासु राइडर अपनी यात्रा के दौरान तिरंगा झंडा साथ लेकर चलते हैं। उनके लिए यह यात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का माध्यम नहीं है, बल्कि देश के लोगों के बीच पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव का संदेश पहुंचाने का प्रयास है।
वे जहां भी पहुंचते हैं, वहां स्थानीय लोगों से संवाद करते हैं और उन्हें पर्यावरण को बचाने की आवश्यकता के बारे में बताते हैं। उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश तभी प्रभावी होगा जब समाज का हर वर्ग इसमें अपनी भूमिका निभाए।

2028 तक यात्रा पूरी करने का लक्ष्य
वासु राइडर ने अपनी यात्रा को वर्ष 2028 तक जारी रखने की योजना बनाई है। अब तक करीब 16 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर चुके वासु राइडर आगे भी देश के विभिन्न हिस्सों में साइकिल से पहुंचकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास जारी रखना चाहते हैं।
उनकी यात्रा का केंद्र बिंदु युवाओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना है। वे चाहते हैं कि युवा छोटी दूरी के लिए साइकिल का उपयोग करें, अनावश्यक रूप से पेट्रोल-डीजल वाहनों का इस्तेमाल न करें और अपने आसपास के पर्यावरण को स्वच्छ रखने में योगदान दें।
आम लोगों से की सहयोग और आशीर्वाद की अपील
वासु राइडर ने आम लोगों से अपने अभियान में सहयोग और आशीर्वाद देने की अपील की है। उनका कहना है कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है। यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने स्तर पर प्रदूषण कम करने का प्रयास करें और बच्चों एवं युवाओं को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करें। उनका लक्ष्य है कि “Stop Pollution Save Earth” का संदेश देश के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे और युवा पीढ़ी पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझे।



55 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद करीब 16 हजार किलोमीटर की साइकिल यात्रा पूरी कर चुके वासु राइडर का यह सफर अभी जारी है। रामानुजगंज से बलरामपुर की ओर बढ़ते उनके कदम इस बात का संदेश दे रहे हैं कि मजबूत इच्छाशक्ति और उद्देश्य के साथ उठाया गया एक छोटा कदम भी समाज में जागरूकता की बड़ी शुरुआत बन सकता है।



