
क्या बलरामपुर जिले को चला रही है कोई ‘चौथी शक्ति’?
कैबिनेट मंत्री, दो विधायक और फिर भी जिले में हो रही है उपेक्षा, कौन है असली संचालक?
बलरामपुर जिला इन दिनों एक अदृश्य शक्ति के संचालन का केंद्र बनता जा रहा है। भले ही जिले में प्रदेश सरकार के एक ताकतवर कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम की मौजूदगी हो, साथ ही दो- दो विधायक (प्रतापपुर और सामरी) का प्रतिनिधित्व भी हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है।
स्थानीय जनप्रतिनिधि जहां प्रशासनिक अवहेलना के शिकार हो रहे हैं, वहीं कई अधिकारी वर्षों से कुर्सी से चिपके बैठे हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जिले की नकेल न तो विधायकों के हाथ में है और न ही कैबिनेट मंत्री के पास। सवाल यह उठता है कि फिर कौन है जो पूरे जिले का असली संचालन कर रहा है?
बैठक में उपेक्षा का उदाहरण
हाल ही में ज़िला कलेक्ट्रेट में आयोजित एक महत्वपूर्ण की बैठक में सामरी विधायक उद्देश्वरी पैकरा को समुचित सम्मान तक प्रशासन ने उपलब्ध नहीं कराया यह अपमानजनक स्थिति देख विधायक बैठक ही छोड़कर लौट गईं।वही विधायक पैकरा खुले मंच से भी अधिकारियों की द्वारा उपेक्षा होने की शिकायत कर चुकी है जिसकी सोशल मीडिया जमकर वायरल हुए थे। वही प्रतापपुर विधायक शकुंतला पोर्ते महिला जनप्रतिनिधि की भी स्थिति जिले में ठीक नहीं है।
कैबिनेट मंत्री की भी अनदेखी
कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम स्वयं पीडब्ल्यूडी विभाग के एक अधिकारी द्वारा कार्यकर्ताओं से दुर्व्यवहा और पत्रकारों से अभद्रता की शिकायत के बावजूद अब तक उस अधिकारी को हटवा नहीं पाए। यह स्थिति दर्शाती है कि मंत्री की साख और प्रभाव भी सीमित होता जा रहा है।
PMGSY का भ्रष्ट निर्माण
PMGSY (प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना) के तहत घटिया सड़क, नाली निर्माण अब कोई नई बात नहीं रही। लेकिन इसके बावजूद जिन अधिकारियों की जवाबदेही बनती है, वे आज भी आराम से जिले में कुर्सी संभाले हुए हैं।
जमे हुए अधिकारी
जिले के PWD,RES,WRD जनपद पंचायत सीईओ से लेकर अन्य विभागों के अधिकारी वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं, जिन पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की कोई पकड़ नहीं दिखती।
अबकारी विभाग (Excise Department)
Excise विभाग की कहानी किसी से छुपी हुई नहीं है अभी हाल ही में इस विभाग की भी वीडियो जमकर वायरल हुई जिसमें आबकारी अधिकारी पक्षकार से वकील के नाम से पैसा मंगवाई थी भला हो उसे नगर पालिका वार्ड क्रमांक 15 के पार्षद की जो मौके पर पहुंचकर आबकारी विभाग की खेल को बिगाड़ दिया जिसके आबकारी अधिकारी बाद बार-बार वीडियो में वकील के नाम से पैसा मंगवाने की बात कर रहे हैं लेकिन कहां जाता है आबकारी विभाग किसी भी मामले में 20 से ₹50000 लेने से भी नहीं संकोच करते हैं इनकी शिकायत होने के बावजूद भी आबकारी विभाग के अधिकारी अभी भी जमे हुए हैं
तो कौन है ‘चौथी शक्ति’?
अब सवाल यही है कि यदि जनप्रतिनिधियों की नहीं चल रही, और अधिकारी भी सरकार से अधिक ताकतवर प्रतीत हो रहे हैं, तो क्या जिले में कोई “चौथी शक्ति” सक्रिय है?
कुछ राजनीतिक सूत्र यह भी संकेत करते हैं कि दूसरे जिले के कैबिनेट मंत्री अप्रत्यक्ष रूप से बलरामपुर जिले के प्रशासनिक ताने-बाने को नियंत्रित कर रहे हैं। इस कथित रणनीति के पीछे रामविचार नेताम और बलरामपुर के विधायकों को कमजोर करना एक संभावित लक्ष्य हो सकता है — ताकि आगामी चुनावों में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़े।
राजनीतिक साजिश या प्रशासनिक अकर्मण्यता?
जिले के हालात यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि जनप्रतिनिधि महज शो-पीस बनकर रह गए हैं। क्या यह प्रशासन की मनमानी है या किसी गहरी राजनीतिक साजिश का हिस्सा, इसका खुलासा तो आने वाला वक्त ही करेगा।
फिलहाल बलरामपुर की जनता, मीडिया और विपक्ष सभी यही सवाल कर रहे हैं:
“कौन चला रहा है बलरामपुर को?”



