शासकीय जमीन पर भूमाफिया का कब्ज़ा बरकरार: फर्जी खसरा-B1बनाकर कर रहे करोड़ों की ठगी

800 एकड़ पर अब भी भू-माफियाओं का कब्जा! कलेक्टर की सख्त कार्रवाई के बावजूद राजस्व अमला बेपरवाह, व्यापारी लाखों गंवा रहे
रामानुजगंज, बलरामपुर | विशेष रिपोर्ट
राजस्व विभाग की घोर लापरवाही और भ्रष्टाचारपूर्ण रवैये ने एक बार फिर से भू-माफियाओं को खुला खेल खेलने का अवसर दे दिया है। यह कोई सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे-सीधे शासकीय संपत्ति की खुलेआम लूट है, जिसमें सिस्टम की चुप्पी और ढीलेपन ने माफियाओं को कानून से ऊपर कर दिया है।

महावीरगंज की 1200 एकड़ बहुचर्चित भूमि — जिसकी सच्चाई सबको पता है — आज भी अवैध सौदों की मंडी बनी हुई है।
अक्टूबर 2024 में अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित राजस्व टीम — जिसमें डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार और आरआई शामिल थे — ने महावीरगंज की इस भूमि की गहन जांच की थी। जांच प्रतिवेदन तत्कालीन कलेक्टर रिमिजियुस एक्का को सौंपा गया था। उन्होंने राजनीतिक दबाव और स्थानीय रसूखदारों की नाराज़गी की परवाह किए बिना 400 एकड़ भूमि को भू-माफियाओं से मुक्त कराकर शासकीय मद में शामिल करने का ऐतिहासिक आदेश दिया। यह कदम पूरे प्रदेश में मिसाल बना।

लेकिन सवाल उठता है — बाकी 800 एकड़ भूमि के साथ क्या हुआ?
उत्तर है — कुछ नहीं!
तत्कालीन कलेक्टर रिमिजियुस एक्का के स्थानांतरण होते ही राजस्व विभाग ने चुप्पी साध ली , कलेक्टोरेट विभाग की निष्क्रियता और राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से अब तक इस शेष भूमि को शासकीय मद में शामिल करने का आदेश तक जारी नहीं हुआ है।

फायदा उठा रहे हैं भू-माफिया, बन गई है जालसाजी की फैक्ट्री
प्रशासन की यह चुप्पी भू-माफियाओं के लिए वरदान बन गई है। वे न सिर्फ इस जमीन पर कब्जा जमाए बैठे हैं, बल्कि इसे वैध भूमि बताकर देशभर में भोले-भाले निवेशकों को ठग रहे हैं। महावीर गंज में लास्ट खसरा नंबर 2365 है इसके बाद कई 237,2367खसरा नंबरों को फर्जी रूप से भू माफिया के द्वारा खुद ही बना दिया गया है इन भूमाफियाओं के द्वारा बड़े ग्राहकों ग्राहकों के साथ जालसाजी कर कर रहे हैं जिसका,ताजा मामला दुर्ग जिले के एक व्यवसायी के साथ सामने आया है, जो रामानुजगंज( महावीरगंज)में सोलर प्लांट लगाने के उद्देश्य से जमीन की तलाश में आए थे।
स्थानीय दलालों ने उन्हें लगभग 192 एकड़ ज़मीन दो लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से दिखाकर कुल चार करोड़ रुपये में सौदा फाइनल करवा दिया। व्यापारी ने ढाई-तीन लाख रुपये बतौर एडवांस भी दे दिए।

जब व्यापारी ने हल्का पटवारी से इस जमीन की सत्यता जाननी चाही, तो खुलासा हुआ कि यह भूमि अभी तक शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है और इसकी वैधता संदिग्ध है। जैसे ही पटवारी को इस गड़बड़ी की भनक लगी, उन्होंने अपने उच्च अधिकारियों को सूचित किया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।



सवालों के घेरे में प्रशासन
जब 400 एकड़ को शासकीय मद में दर्ज करने का साहसिक निर्णय लिया जा चुका है, तो 800 एकड़ पर चुप्पी क्यों?
क्या राजनीतिक या भूमाफियाओं का दबाव इतना अधिक है कि प्रशासन आदेश जारी करने से डर रहा है?
क्या राजस्व विभाग जानबूझकर इस भूमि को विवादास्पद बनाए रखना चाहता है ताकि भूमाफिया अपना खेल खेलते रहें?

व्यवसायी ने सौंपी लिखित शिकायत, प्रशासन खामोश
पीड़ित व्यवसायी ने अपनी शिकायत थाना रामानुजगंज और कलेक्टर बलरामपुर को लिखित रूप में सौंप दी है। उन्होंने मांग की है कि इस प्रकार की धोखाधड़ी से बचाने के लिए जल्द से जल्द कठोर कार्रवाई की जाए और इस भूमि को स्पष्ट रूप से शासकीय घोषित किया जाए।

समाप्त नहीं हुआ खतरा, नए पीड़ितों का बन सकता है जाल
यदि प्रशासन अभी भी नहीं जागा, तो आने वाले समय में कई और व्यापारी, किसान और निवेशक भू-माफियाओं के जाल में फंस सकते हैं। शासकीय भूमि की इस प्रकार खुलेआम खरीद-बिक्री न केवल कानून का मज़ाक है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा तमाचा भी है।


