Khabar30 की खबर का असर: उबका बांध का पानी खोला गया, अब मरम्मत की बारी
उबका बांध में रिसाव के बाद कृषि विभाग ने खोला पानी, टूटने का खतरा टला, मरम्मत की मांग बरकरार
बलरामपुर। रामचन्द्रपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत नीलकंठपुर स्थित उबका बांधमें लगातार हो रहे पानी के रिसाव को लेकर ग्रामीणों की चिंता के बाद आखिरकार कृषि विभाग ने संज्ञान लिया है। बांध के निचले हिस्से से लगातार पानी निकलने की सूचना सामने आने के बाद विभाग ने बांध का पानी खोल दिया है, जिससे बांध पर बढ़ रहे दबाव को कम करने का प्रयास किया गया है। हालांकि, अब ग्रामीण बांध की स्थायी मरम्मत की मांग कर रहे हैं।
दरअसल, लगातार बारिश के बीच उबका बांध के निचले हिस्से से पानी का रिसाव शुरू हो गया था। ग्रामीणों ने इसकी तस्वीरें और वीडियो जिला कलेक्टर को भेजकर स्थिति से अवगत कराया था। कलेक्टर के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर बांध का निरीक्षण भी किया, लेकिन शुरुआती दौर में रिसाव रोकने के लिए ठोस पहल नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी थी।
ग्रामीणों के मुताबिक बांध के नीचे से लगातार पानी बाहर निकल रहा था। बारिश का दौर जारी रहने के कारण उन्हें आशंका थी कि यदि रिसाव बढ़ा तो बांध की संरचना पर दबाव बढ़ सकता है और गंभीर स्थिति निर्मित हो सकती है।

100 एकड़ फसल और 10 से 15 घरों पर खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि उबका बांध में किसी तरह की बड़ी क्षति होने पर करीब 100 एकड़ कृषि भूमि में लगी फसल प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा बांध के निचले हिस्से और नदी किनारे बसे करीब 10 से 15 घरों पर भी खतरा मंडरा सकता है।
उबका बांध आसपास के किसानों के लिए सिंचाई का महत्वपूर्ण स्रोत है। क्षेत्र के कई किसान इसी बांध के पानी से खेती करते हैं, जिससे यह जलस्रोत उनकी आजीविका से सीधे जुड़ा हुआ है।

2008 में हुआ था बांध का निर्माण
ग्रामीणों के अनुसार उबका बांध का निर्माण वर्ष 2008 में कराया गया था। इसके बाद से यह क्षेत्र के किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुख साधन बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस वर्ष बारिश के दौरान बांध के निचले हिस्से से पानी रिसने लगा। पानी लगातार एक स्थान से बाहर निकल रहा था, जिससे ग्रामीणों को बांध की सुरक्षा को लेकर चिंता सताने लगी।
वर्ष 2017 में भी क्षतिग्रस्त हुआ था बांध
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2017 में भी उबका बांध क्षतिग्रस्त हुआ था। उस समय भी शासन-प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई थी। ग्रामीणों के अनुसार तत्काल पर्याप्त मदद नहीं मिलने पर उन्होंने आपस में चंदा जुटाकर वर्ष 2018 में बांध की मरम्मत कराई थी।
ग्रामीणों का कहना है कि इस बार भी जिस क्षेत्र के आसपास पानी का रिसाव हो रहा है, वह पहले क्षतिग्रस्त हुए हिस्से से आगे का स्थान है। ऐसे में वर्ष 2017 की घटना को याद कर लोगों की चिंता और बढ़ गई थी।

शिकायत के बाद अधिकारियों ने किया निरीक्षण
ग्रामीण सुरेंद्र यादव ने बताया कि बारिश शुरू होने के बाद से बांध के नीचे से लगातार पानी निकल रहा था। उन्होंने कहा कि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।
ग्रामीणों के मुताबिक शिकायत मिलने के बाद एसडीएम, तहसीलदार, वन विभाग के कर्मचारियों सहित संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे और बांध की स्थिति का जायजा लिया।
वहीं रामचन्द्रपुर कांग्रेस मंडल अध्यक्ष राजेंद्र श्रीवास ने कहा कि उबका बांध नीलकंठपुर सहित आसपास के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रशासन से बांध की तत्काल तकनीकी जांच और स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव से भी मदद मांगी थी। फंड उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आने के बाद ग्रामीणों ने जेसीबी लगाकर स्वयं मरम्मत का प्रयास किया। इस दौरान सरपंच की ओर से दो हजार रुपये दिए जाने की बात भी सामने आई है।
पिछले साल लुत्ती बांध टूटने की घटना से बढ़ी चिंता
ग्रामीण उबका बांध की स्थिति को लेकर इसलिए भी चिंतित हैं क्योंकि पिछले वर्ष बलरामपुर विकासखंड के ग्राम लुत्ती में भारी बारिश के दौरान करीब 40 साल पुराना लुत्ती बांध टूट गया था। बांध टूटने के बाद बड़े क्षेत्र में पानी फैल गया था और इस घटना में जनहानि के साथ मवेशियों और संपत्ति को भी नुकसान हुआ था।
इसी घटना को देखते हुए ग्रामीण उबका बांध में हो रहे रिसाव को हल्के में नहीं लेने की मांग कर रहे थे।
खबर का असर, कृषि विभाग ने खोला बांध का पानी
Khabar30.in पर उबका बांध में रिसाव और संभावित खतरे की खबर प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद कृषि विभाग ने मामले में संज्ञान लिया। रिसाव की स्थिति को देखते हुए बांध का पानी खोल दिया गया है, ताकि बांध में पानी का दबाव कम किया जा सके और संभावित खतरे को टाला जा सके।
हालांकि, पानी खोलने के बाद तत्काल दबाव कम होने की स्थिति बनी है, लेकिन ग्रामीणों की मांग अब भी कायम है कि बांध की स्थायी और तकनीकी रूप से उचित मरम्मत कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि केवल पानी खोलना स्थायी समाधान नहीं है। बांध की कमजोर जगह की जांच कर आवश्यक मरम्मत जल्द कराना जरूरी है।
उबका बांध आसपास के ग्रामीणों और किसानों के लिए जीवनदायिनी जलस्रोत है। क्षेत्र के लोग सालभर खेती पर निर्भर रहते हैं और उनकी आजीविका का बड़ा हिस्सा इसी बांध से मिलने वाले सिंचाई के पानी पर टिका है।
अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि कृषि विभाग को बांध की स्थायी मरम्मत का काम कब शुरू कराता है। बारिश के बीच बांध की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसानों की फसल तथा निचले क्षेत्र में बसे परिवारों को संभावित खतरे से बचाना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।



