“जमीन खरीदने पर अब नहीं काटने पड़ेंगे तहसील के चक्कर, रजिस्ट्री के साथ होगा नामांतरण”

छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता संशोधन विधेयक 2024 पारित , रजिस्ट्री के साथ होगा नामांतरण
रजिस्ट्री के साथ नामांतरण से लोगों को मिलेगी राहत
छत्तीसगढ़ विधानसभा में हाल ही में भू राजस्व संहिता संशोधन विधेयक 2024 पारित किया गया। इस विधेयक के तहत अब जमीन की रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः पूर्ण हो जाएगी। इस निर्णय से भूमि क्रेताओं को न केवल समय की बचत होगी, बल्कि आर्थिक नुकसान और प्रशासनिक समस्याओं से भी छुटकारा मिलेगा।
राजस्व मंत्री ने दी विधेयक की जानकारी
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए बताया कि भू राजस्व संहिता की धारा 10 में संशोधन किया गया है। इसके तहत रजिस्ट्री के साथ ही भूमि का नामांतरण भी होगा। यह निर्णय भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप है, जिसमें भू अभिलेखों को अद्यतन करने और भूमि विवादों को न्यूनतम करने पर जोर दिया गया है। मंत्री ने कहा कि नामांतरण के इस नए प्रावधान से जियो-रिफ्रेंसिंग और रिकॉर्ड अद्यतन की प्रक्रिया सहज होगी, जिससे भूमि स्वामियों को राहत मिलेगी।
रजिस्ट्री के बाद लोन लेने से नामांतरण में अड़चन
पुराने नियमों में, विक्रेता जमीन विक्रय के बाद भी ऋण पुस्तिका का उपयोग कर बैंकों से लोन ले लेता था।
ऐसे मामलों में खरीदार को नुकसान उठाना पड़ता था और नामांतरण तब तक नहीं हो पाता था, जब तक विक्रेता बैंक का लोन चुकता न कर दे।
नई व्यवस्था के तहत यह समस्या खत्म हो जाएगी, क्योंकि रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण सुनिश्चित होगा।
पुरानी व्यवस्था में लोगों को होती थी परेशानियां
पहले, जमीन खरीदने के बाद नामांतरण कराने में दो से चार महीने लग जाते थे। तहसील कार्यालय के बार-बार चक्कर काटने और प्रशासनिक देरी के कारण लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। कई बार नामांतरण लंबित होने से विक्रेता ऋण पुस्तिका का दुरुपयोग कर बैंक से लोन ले लेते थे, जिससे खरीदारों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
इस व्यवस्था के साथ ही भूमाफिओ के हौसले और बुलंद हो जाएंगे क्योंकि रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण हो जाएगा और गरीब तबके की जमीन कब दूसरे को हस्तांतरित हो गई उन्हें पता भी नहीं चल पाएगा जी
क्या बदल जाएगा नई व्यवस्था से?
विधेयक के पारित होने के बाद, जमीन की रजिस्ट्री के साथ नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः पूर्ण होगी। इससे खरीदार को नामांतरण के लिए तहसील कार्यालय या पंचायत की बैठक का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह निर्णय न केवल समय की बचत करेगा, बल्कि पारदर्शिता और प्रशासनिक कार्यों की गति भी बढ़ाएगा।
नामांतरण को लेकर लोगों की समस्याएं
कोरिया जिले और ग्रामीण क्षेत्रों में नामांतरण की प्रक्रिया बेहद जटिल थी।
तहसील कार्यालय और पंचायत की बैठकें लंबित रहने से महीनों तक लोग नामांतरण के लिए परेशान होते थे।
पंचायतों में प्रक्रिया पूरी करने में छह महीने या उससे अधिक का समय लग जाता था।
छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता संशोधन विधेयक 2024 का पारित होना राज्य के भूमि क्रेताओं के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है। इस नए प्रावधान से जमीन की रजिस्ट्री के साथ नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः पूरी होगी, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी। यह कदम भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन में पारदर्शिता और सरलता सुनिश्चित करेगा, साथ ही लोगों को अनावश्यक प्रशासनिक बाधाओं से मुक्ति दिलाएगा।



