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“नाबालिग से दुष्कर्म” सोशल मीडिया पर फोटो वायरल कर किया ब्लैकमेल, अब 20 साल जेल

शादी का झांसा देकर नाबालिग से दुष्कर्म, कोर्ट ने सुनाई 20 साल की सजा,,पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपी शाहिद उर्फ चिश्ती अंसारी दोषी करार, अलग-अलग धाराओं में हुई सजा

बलरामपुर।
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (POCSO एक्ट) ने नाबालिग से दुष्कर्म और धमकी देने के मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी शाहिद उर्फ चिश्ती अंसारी को 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर विभिन्न धाराओं में अर्थदंड भी लगाया है।

पढ़ाई के दौरान हुआ परिचय, शादी का दिया झांसा

पीड़िता ने 27 जुलाई 2022 को पुलिस चौकी विजयनगर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने बताया कि वर्ष 2021-22 में पढ़ाई के दौरान उसकी जान-पहचान आरोपी शाहिद से हुई। मोबाइल पर बातचीत शुरू हुई और फिर दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए।

पीड़िता के मुताबिक, नवंबर 2021 में आरोपी ने उसे शादी का प्रलोभन देकर बहला-फुसलाकर शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद नवंबर 2021 से अप्रैल 2022 तक अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर उसका लगातार दैहिक शोषण करता रहा। आरोपी को यह जानकारी थी कि पीड़िता नाबालिग है, इसके बावजूद उसने अपराध किया।

समाज और परिवार के डर से रही चुप

पीड़िता ने बताया कि वह समाज और परिवार में बदनामी के डर से लंबे समय तक चुप रही, लेकिन जब आरोपी ने उसका फोटो सोशल मीडिया पर वायरल किया और अत्याचार बढ़ने लगा तो उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने किया मामला दर्ज

पीड़िता की लिखित शिकायत पर उप निरीक्षक धीरेन्द्र बंजारे ने FIR दर्ज की। थाना रामानुजगंज में अपराध क्रमांक 267/2022 पंजीबद्ध कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया और न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।

कोर्ट का कड़ा फैसला

माननीय अपर सत्र न्यायाधीश शुभ्रा पचौरी (फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट, POCSO एक्ट) ने सुनवाई पूरी होने पर आरोपी शाहिद उर्फ चिश्ती अंसारी को दोषी पाया और निम्न सजाएँ सुनाईं—

POCSO एक्ट धारा 6 – 20 वर्ष सश्रम कारावास एवं ₹20,000 अर्थदंड, न देने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास।

IPC धारा 313 – 10 वर्ष सश्रम कारावास एवं ₹1,000 अर्थदंड, न देने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास।

IPC धारा 506 (भाग-2) – 3 वर्ष का कारावास एवं ₹500 अर्थदंड, न देने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास।

IPC धारा 509 – 1 वर्ष का कारावास एवं ₹500 अर्थदंड, न देने पर 1 माह का अतिरिक्त कारावास।


न्यायपालिका का सख्त रुख

इस फैसले से एक बार फिर स्पष्ट संदेश गया है कि नाबालिग के साथ यौन अपराध करने वालों को अदालत किसी भी स्थिति में बख्शेगी नहीं। शादी का झांसा देकर शोषण करने और सोशल मीडिया पर बदनाम करने जैसी हरकतों को न्यायालय बेहद गंभीर अपराध मानते हुए कठोरतम सजा सुना रही है।

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