एनएच-343 खराब”पढ़ाने की राह में गड्ढे: शिक्षकों ने खुद भरी सड़क, डीईओ ने थमाया नोटिस”

सड़क की मरम्मत करना शिक्षकों को पड़ा भारी, बलरामपुर में डीईओ ने थमाया कारण बताओ नोटिस
“स्कूल पहुँचने की जद्दोजहद: सड़क सुधारी, अब कारण बताओ नोटिस”
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहाँ हायर सेकेंडरी स्कूल धंधापुर के दो शिक्षक और दो शिक्षिकाएँ अपने स्कूल आने-जाने के लिए कच्चे रास्ते की मरम्मत कर रहे थे। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

जर्जर एनएच-343 बना वजह
बलरामपुर और आसपास का इलाका लंबे समय से खराब सड़कों की समस्या से जूझ रहा है। नेशनल हाईवे-343 पूरी तरह जर्जर हो चुका है, जिस कारण शिक्षकों को रोजाना स्कूल आने-जाने में कठिनाई होती थी। मजबूरी में उन्होंने सूरजपुर से जुड़ने वाले जंगल के रास्ते का सहारा लिया। यह रास्ता छोटा तो है, लेकिन उसमें जगह-जगह गड्ढे पड़े हुए थे।

शिक्षकों ने खुद भरा रास्ता
कक्षा लेने के लिए समय पर स्कूल पहुँचना और सुरक्षित घर लौटना सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों ने खुद ही कच्ची सड़क के गड्ढे भरने शुरू कर दिए। कुछ दिन पहले उन्होंने मिलकर रास्ते की मरम्मत कर ली ताकि आवागमन आसान हो सके। इसी दौरान किसी ने उनका वीडियो बना लिया।

वीडियो हुआ वायरल, पहुँचा प्रशासन तक
तीन-चार दिन पहले यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि शिक्षक-शिक्षिकाएँ हाथ से गड्ढे भर रहे हैं। वायरल होते ही मामला प्रशासन तक पहुँच गया और इसे आधार बनाकर डीईओ ने कार्रवाई की।
। कारण बताओ नोटिस जारी
जिला शिक्षा अधिकारी डी.एन. मिश्रा ने कहा कि नोटिस शिक्षकों को भेजा गया है और उनका जवाब मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियाँ सरकारी कर्मचारियों की जिम्मेदारी से बाहर हैं और इसकी अनुमति लेना आवश्यक होता है।
सवालों के घेरे में फैसला
अब सवाल यह उठता है कि खराब सड़क की असली जिम्मेदारी किसकी है? क्या शिक्षकों को मजबूरी में सड़क सुधारने पर दंडित किया जाना चाहिए या प्रशासन को समय रहते सड़क मरम्मत की जिम्मेदारी उठानी चाहिए थी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क इतनी खराब है कि स्कूल, अस्पताल और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुँचना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में शिक्षकों का कदम मजबूरी का परिणाम था, न कि नियमों की अवहेलना।


