नगरपालिका की संपत्तियों की कथित अवैध बिक्री का मामला, पार्षद ने शासन से उच्चस्तरीय जांच और एफआईआर की मांग की

नगरपालिका की संपत्तियों की कथित अवैध बिक्री का मामला, पार्षद ने शासन से उच्चस्तरीय जांच और एफआईआर की मांग की
बलरामपुर।
नगर पालिका परिषद बलरामपुर में शासकीय संपत्तियों के कथित दुरुपयोग और अवैध बिक्री का गंभीर मामला सामने आया है। वार्ड क्रमांक 14 के पार्षद गौतम सिंह ने इस संबंध में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को विस्तृत लिखित शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि नगरपालिका की कई संपत्तियों को नियमों की अनदेखी करते हुए बिना परिषद की स्वीकृति और निर्धारित प्रक्रिया के बेच दिया गया है।

पार्षद गौतम सिंह के अनुसार नगर पालिका परिषद में पदस्थ मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) प्रणव राय द्वारा नगरपालिका की संपत्तियों के विक्रय में गंभीर अनियमितताएं बरती गई हैं। शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि नगर पालिका के 15 से अधिक पानी के टैंकर, एक पुराना एचएमटी ट्रैक्टर-ट्रॉली तथा पुराने बाजार का शेड भी बिना सक्षम स्वीकृति और नियमानुसार प्रक्रिया अपनाए बेच दिया गया।
उन्होंने कहा कि किसी भी शासकीय संपत्ति को बेचने के लिए परिषद की अनुमति, खुली निविदा प्रक्रिया, पारदर्शिता और विधिवत दस्तावेजी प्रक्रिया अनिवार्य होती है, लेकिन इस पूरे मामले में इन नियमों का पालन नहीं किया गया। इससे प्रथम दृष्टया यह मामला शासकीय संपत्ति के दुरुपयोग और संभावित भ्रष्टाचार से जुड़ा प्रतीत होता है।
मामले को और गंभीर बनाते हुए पार्षद ने बताया कि 2 अप्रैल 2026 की सुबह एक पानी का टैंकर, जिसे कथित रूप से लगभग 20 हजार रुपये में दीपक गुप्ता नामक व्यक्ति को बेचा गया बताया जा रहा है, वार्ड क्रमांक 12 स्थित एक वेल्डिंग शॉप से बरामद किया गया। इस घटना के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है। इस संबंध में पार्षद द्वारा बलरामपुर थाना प्रभारी को भी अलग से शिकायत दी गई है और जांच की मांग की गई है।

पार्षद गौतम सिंह ने शासन को भेजी गई शिकायत में मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि नगरपालिका की स्टॉक पंजी और संबंधित अभिलेखों को तत्काल जब्त कर संपत्तियों का उच्चस्तरीय ऑडिट कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नगर पालिका की किन-किन संपत्तियों का किस प्रक्रिया के तहत विक्रय किया गया।

उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो महत्वपूर्ण दस्तावेजों और अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। इसलिए जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए संबंधित सीएमओ को पद से हटाने और अभिलेखों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।
इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों में भी नाराजगी और चर्चा का माहौल है। कई लोगों का कहना है कि नगरपालिका की संपत्तियां जनता की संपत्ति होती हैं और यदि इन्हें नियमों को दरकिनार कर बेचा जा रहा है तो यह बेहद गंभीर विषय है। नागरिकों का मानना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाला मामला है, बल्कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के प्रति जनता के विश्वास पर भी असर पड़ता है।

फिलहाल इस पूरे मामले में नगर पालिका प्रशासन या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब यह देखना होगा कि नगरीय प्रशासन विभाग और पुलिस इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। स्थानीय लोगों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि मामले में पारदर्शी जांच होती है या नहीं और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।




