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मितानिन कार्यक्रम के कर्मियों का भविष्य अधर में, 22 वर्षों की सेवा के बाद 105 कर्मियों की नौकरी पर मंडराया संकट

ANAND MISHRA OFFICIAL PRESENTS


22 वर्षों से सेवा दे रहे मितानिन कार्यक्रम के 105 कर्मियों का भविष्य अधर में, NHM में समायोजन पर असमंजस


रायपुर, छत्तीसगढ़:
छत्तीसगढ़ में 2002 से संचालित मितानिन कार्यक्रम, जो राज्य की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माना जाता है, अब अपने सबसे बड़े संकट का सामना कर रहा है। इस कार्यक्रम के तहत राज्य व जिला स्तर पर 22 वर्षों से कार्यरत 105 कर्मियों का भविष्य अब अंधकार में है। इन कर्मियों ने अपना जीवन राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए समर्पित कर दिया। आज वही कर्मी अपने रोजगार और परिवार के भरण-पोषण के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

मितानिन कार्यक्रम: एक ऐतिहासिक पहल

मितानिन कार्यक्रम 2002 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इस मॉडल को इतना सफल माना गया कि इसी से प्रेरित होकर भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर आशा कार्यकर्ता कार्यक्रम की शुरुआत की।



स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़: मितानिन कार्यक्रम ने स्वास्थ्य जागरूकता, मातृ-शिशु देखभाल, टीकाकरण, और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में अभूतपूर्व योगदान दिया है।

समर्पित कार्यबल: इस कार्यक्रम में जुड़े 105 कर्मियों ने दो दशकों से अधिक समय तक कार्यक्रम के संचालन में अपनी सेवाएं दीं, लेकिन आज उनकी सेवाएं अनिश्चितता की स्थिति में हैं।


राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) का निर्णय

12 अगस्त 2024 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की कार्यकारिणी की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि मितानिन कार्यक्रम की सभी गतिविधियों का संचालन NHM के माध्यम से किया जाएगा। इसके बाद:

अनुबंध विस्तार: 26 नवंबर 2024 को SHRC (राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र) के अनुबंध को 31 दिसंबर 2024 तक बढ़ाया गया।

भुगतान की व्यवस्था: निर्णय लिया गया कि SHRC के अधीन कार्यरत कर्मियों को 31 दिसंबर 2024 तक मानदेय का भुगतान किया जाएगा।

समायोजन का वादा: बैठक में यह भी तय हुआ कि 105 कर्मियों को NHM में समायोजित किया जाएगा।


समायोजन की स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं

हालांकि, जनवरी 2025 आ चुकी है, लेकिन 105 कर्मियों को NHM में समायोजित करने के संबंध में अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

कार्य के भविष्य पर सवाल: जनवरी 2025 से इन कर्मियों को कार्य करना है या नहीं, इस पर भी कोई स्पष्टता नहीं है।

आय का संकट: अनुबंध समाप्त होने के बाद से कर्मियों की आय पर संकट उत्पन्न हो गया है, जिससे उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।


कर्मियों की दुविधा और मांग

इन 105 कर्मियों का कहना है कि उन्होंने 22 वर्षों तक राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में योगदान दिया है। उनकी मांगें निम्नलिखित हैं:

1. NHM में समायोजन: बिना किसी नई भर्ती प्रक्रिया के उन्हें सीधे NHM में समायोजित किया जाए।


2. आर्थिक सुरक्षा: उनकी सेवाओं को जारी रखते हुए नियमित वेतन और लाभ प्रदान किए जाएं।


3. कार्य अनुभव का सम्मान: उनके अनुभव और योगदान को ध्यान में रखते हुए स्थायी रोजगार की गारंटी दी जाए।



कर्मियों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति

उम्र का प्रभाव: 105 कर्मियों में से अधिकांश की उम्र 45 वर्ष से अधिक हो चुकी है, जिससे उनके लिए नई नौकरी की संभावनाएं बहुत कम हो गई हैं।

परिवार पर असर: इन कर्मियों के परिवार उनकी आय पर निर्भर हैं, और रोजगार की अनिश्चितता के कारण उनके बच्चों की शिक्षा और परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।

समर्पण का अनदेखा होना: 22 वर्षों का अनुभव और समर्पण होने के बावजूद इन्हें केवल आश्वासन दिया जा रहा है।


सरकार और प्रशासन की चुप्पी

राज्य सरकार और NHM के अधिकारी इस मामले में अभी तक कोई ठोस बयान नहीं दे सके हैं। कर्मियों का कहना है कि उन्होंने कई बार ज्ञापन और अनुरोध पत्र प्रस्तुत किए, लेकिन उन्हें अब तक सिर्फ आश्वासन मिला है।

मितानिन कर्मियों का भविष्य और उनका संघर्ष

SHRC और NHM के अनुबंध समाप्त होने के बाद यह सवाल खड़ा होता है कि इन 105 कर्मियों का भविष्य क्या होगा। अगर इन्हें समायोजित नहीं किया गया, तो:

स्वास्थ्य सेवाओं पर असर: राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, मितानिन कार्यक्रम के बिना भारी नुकसान होगा।

सामाजिक आंदोलन की चेतावनी: कर्मियों ने कहा है कि अगर जल्द ही समाधान नहीं निकाला गया, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन करेंगे।


क्या कहता है मितानिन कर्मियों का पक्ष?

मितानिन कार्यक्रम में कार्यरत एक वरिष्ठ कर्मी ने बताया, “हमने अपना पूरा जीवन इस कार्यक्रम को मजबूत बनाने में लगा दिया। आज हमें सरकार से केवल आश्वासन मिल रहा है। हमारी मांग है कि हमें तुरंत NHM में समायोजित किया जाए और हमारी सेवाओं का सम्मान किया जाए।”

समाज और प्रशासन के लिए संदेश

मितानिन कार्यक्रम के कर्मियों का योगदान छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने में ऐतिहासिक रहा है। इन कर्मियों के अनुभव और सेवा को नजरअंदाज करना केवल इन कर्मियों के साथ अन्याय नहीं होगा, बल्कि पूरे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को भी कमजोर करेगा।

सरकार और प्रशासन को जल्द से जल्द इस मामले पर उचित निर्णय लेकर 105 कर्मियों के भविष्य को सुरक्षित करना चाहिए।

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