शंकरगढ़ में छात्राओं से अतिथियों की जूठन उठवाने का ! वायरल वीडियो ने प्रशासन की व्यवस्था की खोली पोल?
शंकरगढ़ में छात्राओं से अतिथियों की जूठन और खाली बोतलें उठवाने का वीडियो वायरल, प्रशासन पर उठे सवाल

सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा वीडियो, कुर्सियों की सफाई और इस्तेमाल किए टिश्यू पेपर उठवाने का भी दावा; बड़े अधिकारियों की मौजूदगी में छात्राओं की भूमिका पर उठे सवाल
शंकरगढ़ (बलरामपुर)। सरकारी आयोजनों में बच्चों और छात्राओं को सम्मान देने तथा उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने की बातें की जाती हैं, लेकिन बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम से जुड़ा वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ रहा है। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि काका लरंग साय की प्रतिमा अनावरण एवं विकास कार्यों के भूमिपूजन कार्यक्रम में पहुंचीं छात्राओं से मंच पर बैठे अतिथियों की इस्तेमाल की हुई नाश्ते की सामग्री और पानी की खाली बोतलें उठवाई गईं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में छात्राओं की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वीडियो के साथ किए जा रहे दावों के मुताबिक, छात्राओं से मंच पर इस्तेमाल हुई सामग्री समेटने के अलावा कुर्सियों की सफाई भी कराई गई। इतना ही नहीं, एक एसडीएम द्वारा चेहरे और हाथ साफ करने के बाद इस्तेमाल किया गया टिश्यू पेपर भी छात्रा से उठवाए जाने का दावा किया जा रहा है।
बड़े अधिकारियों की मौजूदगी में आखिर क्या हो रहा था?
बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में कलेक्टर, एसडीएम, क्षेत्रीय विधायक उद्देश्वरी पैकरा सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। ऐसे में वायरल वीडियो ने प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आखिर छात्राओं को कार्यक्रम में किस उद्देश्य से बुलाया गया था? क्या उनकी भूमिका अतिथियों का स्वागत करने तक सीमित थी या उनसे सफाई और इस्तेमाल की गई सामग्री उठाने जैसे काम भी कराए गए? यदि वायरल वीडियो के साथ किए जा रहे दावे सही हैं, तो यह भी जांच का विषय है कि छात्राओं को ऐसा करने के निर्देश किसने दिए?
मुख्यमंत्री नहीं पहुंचे, कार्यक्रम हुआ वर्चुअल
गौरतलब है कि मौसम खराब होने के कारण मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शंकरगढ़ के इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके और कार्यक्रम वर्चुअल माध्यम से संपन्न हुआ। लेकिन अब सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के कारण कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
प्रशासन की चुप्पी पर भी उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की जांच होनी चाहिए और यह बताया जाना चाहिए कि छात्राओं से कथित तौर पर ये काम किसके निर्देश पर कराए गए। सरकारी कार्यक्रमों में बच्चों की गरिमा और सम्मान सुनिश्चित करना आखिर किसकी जिम्मेदारी है?

वीडियो की सच्चाई क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि और स्वतंत्र जांच जरूरी है। लेकिन वायरल वीडियो के साथ उठ रहे सवालों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। अब निगाहें जिला प्रशासन के जवाब और संभावित जांच पर टिकी हैं।
डिस्क्लेमर: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और उसके साथ किए जा रहे दावों के आधार पर यह खबर प्रकाशित की गई है। khabar30.in इस वायरल वीडियो की सत्यता, प्रामाणिकता अथवा इसमें किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है। खबर का उद्देश्य वायरल वीडियो के माध्यम से सामने आए सवालों को संबंधित प्रशासन तक पहुंचाना है।



