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“बलरामपुर में मिट्टी से बनी ‘सीमेंट नाली’! करोड़ों की योजना में खुला भ्रष्टाचार”

बलरामपुर जिले में मिट्टी से बनी ‘सीमेंट नाली’! करोड़ों की योजना में खुला भ्रष्टाचार, जिम्मेदारों पर उठे सीधे सवाल

बलरामपुर/कुसमी
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के तहत देशभर के गांवों को पक्की सड़क और जल निकासी व्यवस्था से जोड़ने का सपना दिखाया जाता है। लेकिन छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में इस योजना के नाम पर सिर्फ कागजों पर ‘विकास’ नजर आ रहा है, जबकि जमीनी हकीकत शर्मनाक और चौकाने वाली है।


हम बात कर रहे हैं कुसमी विकासखंड के चटनियां से सबाग मार्ग की, जहां PMGSY के अंतर्गत सड़क के किनारे नाली निर्माण किया जा रहा है। इस नाली की लागत करोड़ों में है। इसका मकसद था – बारिश के पानी को सुरक्षित ढंग से बाहर निकालना ताकि सड़क बर्बाद न हो। लेकिन जो निर्माण हुआ है, उसने इस योजना की साख पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

जमीन पर क्या हो रहा है?

नाली में सीमेंट, गिट्टी और रेत की जगह सिर्फ मिट्टी का भराव कर दिया गया है।

ऊपर से एक पतली सीमेंट की परत मार दी गई है ताकि ये "पक्की नाली" दिखे।

दीवारों से मिट्टी झड़ रही है, कई जगहों पर दरारें और टूट-फूट पहले ही नजर आने लगी हैं।

बारिश से पहले ही नाली के उखड़ने की नौबत आ चुकी है।

ग्रामीणों का व्य:

स्थानीय निवासी खुलकर बोल रहे हैं। एक ग्रामीण ने साफ कहा,
“साहब, नाली में एक किलो भी सीमेंट नहीं है। सब मिट्टी से बना है। कोई सुनने वाला नहीं है। अधिकारी आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और चले जाते हैं। कार्रवाई कोई नहीं करता।”


निरीक्षण या दिखावा?

सबसे गंभीर बात ये है कि PMGSY विभाग के अधिकारी नियमित निरीक्षण कर रहे हैं। इसके बावजूद इतना बड़ा भ्रष्टाचार कैसे नजरों से बचा रह गया? क्या अधिकारी भी इस भ्रष्टाचार में शामिल हैं?

दो-दो विभाग, एक ही अफसर – फिर भी जवाबदेही नहीं!

बलरामपुर जिले में RES और PMGSY – दोनों विभागों की कमान जिन अफसरों के पास है,अपने पद पर जमे हुए हैं। इन अफसरों की ‘ऊंची पहुंच’ अब जनता के बीच संदेह का कारण बन चुकी है।

लोग कह रहे हैं – “सरकारी योजनाओं के नाम पर खुलेआम लूट मची है। जब ऊंचे पदों पर बैठे लोग ही खेल कर रहे हैं, तो नीचे क्या उम्मीद की जाए?”

कलेक्टर का बयान – लेकिन असर कहाँ है?

जिले के कलेक्टर ने बयान दिया है कि

“घटिया निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों पर कार्रवाई होगी और निर्माण दोबारा कराया जाएगा।”
लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही बयान कर रहे हैं।

कलेक्टर और अन्य अधिकारी कई बार निरीक्षण कर चुके हैं – लेकिन स्थिति जस की तस है। सवाल उठता है –“क्या जिले के आला अफसरों की चेतावनी भी इन अधिकारियों पर बेअसर है?”

सरकारी योजनाओं पर बट्टा

PMGSY केंद्र की प्रधानमंत्री योजना है, जिसके तहत दुर्गम, पिछड़े इलाकों को मुख्य मार्ग से जोड़ने का सपना है। राज्य सरकार भी मुख्यमंत्री सड़क योजना के ज़रिए यही काम कर रही है। लेकिन बलरामपुर जिले की इस हकीकत ने ये साबित कर दिया है कि योजनाओं को माफिया, अफसर और ठेकेदार की तिकड़ी किस तरह बर्बाद कर रही है।

10 किलोमीटर में भ्रष्टाचार की लंबाई

करीब 10 किलोमीटर की इस नाली में हर 200 मीटर पर गड़बड़ी साफ दिख रही है। ये तो सिर्फ एक मार्ग की हालत है। सवाल ये है कि बाकी जगहों पर क्या हो रहा होगा?

अब जनता पूछ रही है –

जब बार-बार निरीक्षण हुआ, तो यह घटिया काम क्यों नहीं रोका गया?

क्या ठेकेदार को बचाया जा रहा है?

EE और SDO जैसे जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई कब होगी?

क्या दोषियों को सिर्फ नोटिस देकर छोड़ दिया जाएगा?

PMGSYमें बैठे अफसर अगर इस मामले में भी बचे रहेंगे, तो यह संदेश जाएगा कि सिस्टम खुद भ्रष्टाचार का संरक्षक बन चुका है।
अब देखना ये है कि जिला प्रशासन और सरकार इस रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई करती है – कड़ी सजा या सिर्फ लीपापोती?

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