बलरामपुर में अफसरशाही हावी, जनता बेहाल,भ्रष्टाचार, लापरवाही और अनियमितताओं से सवालों के घेरे में जिला प्रशासन

बलरामपुर में अफसरशाही का तांडव,जनता बेहाल,भ्रष्टाचार, लापरवाही और अनियमितताओं ने खोली जिला प्रशासन की पोल
बलरामपुर।
जिला प्रशासन की नाकामी एक-एक कर घटनाओं के आईने में सामने आ रही है। कहीं एसीबी की छापेमारी ने रिश्वतखोरी उजागर की, तो कहीं बच्चों की मौत ने स्वास्थ्य सेवाओं की कलई खोल दी। टूटते बांध, जर्जर सड़कें और गरीबों का हक छीनते गोदाम… हर जगह अफसरशाही की मनमानी और बेपरवाही का खेल साफ दिख रहा है।
भ्रष्टाचार की गहरी पैठ
हालिया एसीबी छापे में पटवारी समेत कई कर्मचारी रंगे हाथों पकड़े गए। यह कोई पहली घटना नहीं है। हर विभाग में कमीशनखोरी का ऐसा जाल बिछा है, जिसने प्रशासन की रीढ़ को खोखला कर दिया है।
शिक्षक बने मजदूर
सड़क विभाग की अकर्मण्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि टूटी-फूटी सड़कों की मरम्मत के लिए शिक्षकों को खुद फावड़ा उठाना पड़ा। यह न केवल प्रशासनिक असफलता है, बल्कि आम नागरिकों की मजबूरी और बेबसी की जीवंत तस्वीर भी है। शिक्षकों की शाबाशी की जगह थमाया गया नोटिस
गरीबों का राशन, अफसरों की मेहरबानी
गरीबों के लिए तय शासकीय राशन निजी गोदामों में दबा मिला। यह खुलासा सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि गरीबों के पेट पर सीधा डाका है। सवाल उठता है कि आखिर यह खेल कितनी ऊंची मिलीभगत से चल रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली
स्वास्थ्य विभाग की नाकामी की कीमत मासूम बच्चों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। ग्रामीण अंचल आज भी अस्पताल और संसाधनों के बिना तड़प रहा है। प्रशासन की यह बेरुखी मौत का परवाना बन चुकी है।
मौत का बांध
जर्जर बांध के टूटने से कई ग्रामीण काल के गाल में समा गए। अगर समय पर मरम्मत होती तो यह त्रासदी टल सकती थी। हादसे ने साबित कर दिया कि जिले में आपदा प्रबंधन महज फाइलों तक सीमित है।
यूरिया की कमी से किसान बेहाल
किसानों के लिए सर दर्द बन गया यूरिया खाद पूरे जिले में 266 रुपए की खाद 800 से लेकर 1200 में खरीदने को मजबूर किसान वही समितियां से छोटे किसानों की जगह बिचौलियों को दिए जा रहे हैं यूरिया खाद शिकायत के बावजूद भी नहीं होती है कार्रवाई
फाइलों में विकास, जमीन पर सन्नाटा
स्थानीयों का आरोप है कि करोड़ों की योजनाओं का पैसा तो निकल चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम या तो अधूरा है या गायब। कमीशनखोरी और अफसर-कर्मचारियों की मिलीभगत ने विकास को मजाक बना दिया है।
बलरामपुर: अफसरों का “पिकनिक स्पॉट”
ग्रामीणों का कहना है कि शाम ढलते ही अफसर बलरामपुर छोड़ अंबिकापुर की ओर रवाना हो जाते हैं। ऐसे में जिले की समस्याएं, योजनाएं और जनता का दुख—सब बेमानी हो जाते हैं।
बड़ा सवाल
जब अफसर ही जनता से मुंह मोड़ लेंगे, तो बलरामपुर का भविष्य कौन संवारेगा? जनता कब तक भ्रष्टाचार और लापरवाही की इस अंधी सुरंग में पिसती रहेगी?



