त्रिपुरी गांव में करोड़ों की अफीम खेती पकड़ी, पुलिस-प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में 43 क्विंटल बरामद,4.75 करोड़ की फसल जब्त, 7 आरोपी गिरफ्तार

त्रिपुरी में अवैध अफीम की खेती का बड़ा भंडाफोड़: 3.67 एकड़ में उगाई गई फसल जब्त, 7 आरोपी गिरफ्तार, 4.75 करोड़ की अफीम बरामद
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कुसमी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम त्रिपुरी घोसराडांड़ में अवैध रूप से की जा रही अफीम की खेती का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस, प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में लगभग 3.67 एकड़ भूमि पर उगाई गई अफीम की फसल को जब्त किया गया है। इस कार्रवाई में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। बरामद अफीम का कुल वजन 4344.569 किलोग्राम (करीब 43 क्विंटल) बताया गया है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 4 करोड़ 75 लाख रुपये आंकी गई है। मामले में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8 और 18 के तहत अपराध दर्ज कर विस्तृत विवेचना की जा रही है।
मुखबिर की सूचना से खुला मामला
जानकारी के अनुसार 10 मार्च 2026 को थाना प्रभारी कुसमी को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम त्रिपुरी घोसराडांड़ में रूपदेव भगत और कौशिल भगत के खेत में कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अनुविभागीय अधिकारी कुसमी, थाना प्रभारी कुसमी, एसएफएल टीम, प्रशासनिक अधिकारियों तथा अन्य विभागों की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची।
घटनास्थल पर पहुंचकर टीम ने जब खेत का निरीक्षण किया तो वहां बड़े पैमाने पर अफीम की खेती होती हुई पाई गई। मौके पर कुछ लोग खेत की रखवाली करते मिले। पूछताछ करने पर उन्होंने अपने नाम रूपदेव राम भगत, कौशिल भगत, मनोज कुमार, जिरमल मुण्डा, उपेन्द्र कुमार, विन्देश्वर और कृष्णा सिंह बताया।

मौके से भारी मात्रा में अफीम बरामद
पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर ही अवैध अफीम की खेती को जड़, तना, पत्ती, फूल और फल सहित उखाड़कर जब्त किया। इसके अलावा खेत में पड़े दो डिब्बों में आधा-आधा भरा हुआ अफीम का लासा भी बरामद किया गया। वहीं चार बड़ी बोरियों और एक छोटी बोरी में अफीम के सूखे फल भी मिले।
सभी बरामद सामग्री का विधिवत पंचनामा तैयार कर तौल कराया गया, जिसमें कुल 4344.569 किलोग्राम अवैध अफीम बरामद हुई। बरामद मादक पदार्थ की अनुमानित कीमत लगभग 4 करोड़ 75 लाख रुपये आंकी गई है। इसके बाद सातों आरोपियों को एनडीपीएस एक्ट के तहत विधिवत गिरफ्तार किया गया।

अंतरराज्यीय कनेक्शन की भी जांच
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस अवैध खेती में अलग-अलग राज्यों के लोग शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों में कुछ छत्तीसगढ़ के निवासी हैं, जबकि कुछ आरोपी बिहार के गया जिले तथा झारखंड के चतरा जिले से जुड़े हुए हैं। इस कारण पुलिस अब इस पूरे मामले में अंतरराज्यीय नेटवर्क और सप्लाई चेन की भी जांच कर रही है।

1.488 हेक्टेयर भूमि में हो रही थी खेती
कलेक्टर राजेन्द्र कटारा ने बताया कि प्रशासनिक जांच में पाया गया कि कुल 1.488 हेक्टेयर यानी लगभग 3.67 एकड़ भूमि में अवैध अफीम की खेती की जा रही थी। राजस्व अभिलेखों के अनुसार यह भूमि ‘पड़ती’ के रूप में दर्ज है और सामान्यतः यहां खेती नहीं होती है। इसी कारण रबी फसल की गिरदावरी भी नहीं की गई थी।
प्रशासन, पुलिस और अन्य विभागों की संयुक्त टीम ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की उपस्थिति में एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के तहत अफीम की फसल का परीक्षण कर जब्ती की कार्रवाई की।

एंड-टू-एंड विवेचना जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इसकी एंड-टू-एंड विवेचना शुरू कर दी है। इस प्रकरण में आर्थिक लेन-देन, फंडिंग और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस अवैध खेती के पीछे कौन लोग हैं और इसका नेटवर्क किन-किन क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
जिले में चलाया जा रहा सघन जांच अभियान
इस घटना के बाद जिला प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा पूरे जिले में विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है। खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों में सघन चेकिंग और निगरानी की जा रही है ताकि भविष्य में इस प्रकार की अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आम नागरिकों से सहयोग की अपील
कलेक्टर राजेन्द्र कटारा ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में अफीम या अन्य मादक पदार्थों की खेती की जानकारी मिले तो तुरंत जिला प्रशासन या पुलिस को इसकी सूचना दें। उन्होंने कहा कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और सूचना के आधार पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।




