बलरामपुर में धान उठाव में देरी से बढ़ी चिंता, सूखतेओर खराब धान से खरीदी प्रभारियों को नुकसान का खतरा

बलरामपुर:
बलरामपुर जिले में धान खरीदी केंद्रों से धान उठाव में हो रही देरी अब गंभीर समस्या बनती जा रही है। जनवरी माह में डीओ (डिलीवरी ऑर्डर) कटने के बावजूद कई खरीदी केंद्रों से अब तक धान का उठाव नहीं हो पाया है। मार्च समाप्ति की ओर है, लेकिन धान अभी भी केंद्रों में पड़ा हुआ है, जिससे धान के सूखने और खराब होने की आशंका बढ़ गई है। इससे खरीदी केंद्र प्रभारियों को आर्थिक नुकसान होने की संभावना साफ दिखाई दे रही है।
खरीदी केंद्र प्रभारियों का कहना है कि मिलर्स तय मानक से कम धान लेने को तैयार नहीं होते। वे अपने अनुसार मात्रा तय कर ही धान उठाव करते हैं, जिसके कारण लगातार देरी हो रही है। जनवरी से अब तक कई केंद्रों में धान का उठाव नहीं होने से बड़ी मात्रा में धान सूख चुका है।
प्रभारियों के अनुसार, यदि धान खराब होता है या उसका वजन कम होता है तो उसकी भरपाई कौन करेगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। प्रशासन इस नुकसान को मानने के लिए तैयार नहीं दिख रहा है, जिससे खरीदी केंद्र प्रभारियों में चिंता बढ़ती जा रही है।
वहीं इस मामले में जब विपणन अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जो भी मिलर धान उठाव में देरी करते हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार जुर्माना लगाया जाता है। हालांकि फील्ड की स्थिति कुछ अलग ही नजर आ रही है। मिलर अपनी शर्तों के अनुसार ही धान उठाने को तैयार होते हैं और कम मात्रा में उठाव नहीं करते।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि खरीदी केंद्रों से धान उठाव में इतनी देरी क्यों हो रही है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। यदि धान सूखने से नुकसान होता है तो उसकी भरपाई कौन करेगा—मिलर, खरीदी प्रभारी, विपणन अधिकारी, खाद्य विभाग या फिर सरकार?
फिलहाल खबर लिखे जाने तक जिले की कई समितियों में जनवरी माह के डीओ कटे हुए हैं, लेकिन अब तक धान का उठाव नहीं हो पाया है। स्थिति को लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।



