एक तरफ दीपावली की रोशनी, दूसरी तरफ पटवारियों के घरों में मायूसी, पांच पटवारी निलंबित
दीपावली से पहले वाड्रफनगर के पांच पटवारियों पर गिरी निलंबन की गाज, परिवारों की खुशियों पर लगा ग्रहण

दीपावली की खुशियों के बीच पांच पटवारियों पर निलंबन की गाज, धरने पर बैठे पटवारियों के परिवारों में छाई मायूस
वाड्रफनगर। जहां एक ओर पूरे देश में दीपावली पर्व की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और लोग अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने की तैयारी में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर अपने अधिकारों की मांग को लेकर धरने पर बैठे वाड्रफनगर तहसील के पांच पटवारियों पर निलंबन की कार्रवाई किए जाने से उनके परिवारों में मायूसी छा गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) वाड्रफनगर द्वारा 1 नवंबर 2026 को जारी आदेश के तहत तहसील वाड्रफनगर के पांच पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। जारी आदेश में उल्लेख किया गया है कि संबंधित पटवारियों को कार्यालयीन कारण बताओ नोटिस दिनांक 15 अक्टूबर 2026 एवं 31 अक्टूबर 2026 के माध्यम से कर्तव्य पर उपस्थित होकर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद पटवारियों के ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होने और नोटिस का जवाब नहीं देने को कार्रवाई का आधार बनाया गया है।

प्रशासन का कहना है कि पटवारियों की अनुपस्थिति के कारण धान गिरदावरी सहित किसानों से जुड़े महत्वपूर्ण शासकीय कार्य प्रभावित हो रहे थे। इसे कर्तव्य के प्रति लापरवाही और शासकीय निर्देशों की अवहेलना मानते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 तथा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि में संबंधित पटवारियों का मुख्यालय तहसील कार्यालय रघुनाथनगर निर्धारित किया गया है। साथ ही नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने का भी उल्लेख आदेश में किया गया है।

एक तरफ दीपावली की रोशनी, दूसरी तरफ परिवारों में मायूसी
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल उन परिवारों की स्थिति को लेकर उठ रहा है, जिनके घरों में दीपावली की तैयारियां चल रही थीं। जिस समय लोग अपने घरों को रोशन करने, बच्चों के लिए नए कपड़े और मिठाइयां खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, उसी समय निलंबन की खबर से संबंधित पटवारियों के परिवारों की खुशियों पर असर पड़ने की आशंका है।

अपने अधिकारों की मांग को लेकर धरने पर बैठे कर्मचारियों पर त्योहार के ठीक पहले हुई इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आखिर क्या बातचीत और आपसी सहमति से इस मामले का समाधान नहीं निकाला जा सकता था? क्या दीपावली जैसे पर्व के मद्देनजर प्रशासन और पटवारी संघ के बीच कोई सकारात्मक पहल नहीं हो सकती थी?

सरकार और प्रशासन से परिवारों की उम्मीद
अब देखना होगा कि शासन और जिला प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं। पटवारियों की मांगों, प्रशासनिक निर्देशों और किसानों के प्रभावित हो रहे कार्यों के बीच कोई ऐसा रास्ता निकलता है या नहीं, जिससे गतिरोध समाप्त हो सके।
दीपावली रोशनी और खुशियों का त्योहार है। ऐसे में संबंधित पटवारियों के परिवारों को भी उम्मीद है कि उनकी समस्याओं पर शासन गंभीरता से विचार करेगा और मामले का समाधान निकालने के लिए सकारात्मक पहल करेगा।



