बलरामपुर में यूरिया की कालाबाज़ारी: 266 की खाद 750 से 800 में बेच रहे बिचौलिए

बलरामपुर में यूरिया खाद की कालाबाज़ारी, किसानों पर संकट गहराया,खुदरा मूल्य 266 रुपये, पर मिल रहा 800 तक
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में यूरिया खाद की भारी किल्लत ने किसानों की कमर तोड़ दी है। केंद्र सरकार ने यूरिया का अधिकतम खुदरा मूल्य 266 रुपये तय किया है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि किसान इसे 750 से 850 रुपये प्रति बोरी तक खरीदने को मजबूर हैं।

कृषि मंत्री का क्षेत्र, फिर भी किल्लत
यह स्थिति और भी हैरान करती है क्योंकि बलरामपुर-रामानुजगंज क्षेत्र को कृषि मंत्री राम विचार नेताम का इलाका माना जाता है। मंत्री के गृह क्षेत्र में ही किसान यूरिया जैसी बुनियादी ज़रूरत के लिए बिचौलियों के रहमोकरम पर निर्भर हैं।
ट्रक से सीधे गोदामों में, फिर काला बाज़ार
किसानों का आरोप है कि यूरिया की खेप जब भी जिले में पहुंचती है, उसे सीधे व्यापारियों और बिचौलियों के गोदामों में उतार लिया जाता है। वहां से जानबूझकर किल्लत पैदा की जाती है, ताकि खाद खुले बाजार में नहीं मिले और बाद में ऊंचे दाम पर किसानों को बेचा जा सके।
आज सुबह भी ऐसी ही घटना सामने आई—एक ट्रक लोड यूरिया आने के बाद, उसे बाजार में उतारने के बजाय व्यापारी अपने गोदामों में ले गए।
प्रभावित क्षेत्र
बलरामपुर जिले के रामानुजगंज, शंकरगढ़, कुसमी, राजपुर और वाड्राफनगर सहित कई इलाकों में किसान खाद के लिए भटक रहे हैं। छोटे और सीमांत किसान, जिनके पास खरीफ फसल की तैयारी का वक्त है, सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
किसानों की मजबूरी – किसानों की ज़ुबानी
रामेश्वर यादव (परिवर्तित नाम ग्राम कुसमी): “सरकार कहती है 266 में मिलेगा, लेकिन हमें, 750 से 800 रुपये देने पड़ रहे हैं। अगर न लें तो धान की फसल खराब हो जाएगी। हम जाएं तो जाएं कहां?”
गुलाब सिंह (परिवर्तित नाम ग्राम वाड्राफनगर): “सुबह लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन खाद डिपो में मिलता ही नहीं। बाद में वही बोरी बिचौलिए ऊंचे दाम पर बेचते हैं। ये सब मिलीभगत से हो रहा है।”
सुकवंत बाई ( परिवर्तित नाम ग्राम ग्राम राजपुर): “हम छोटे किसान हैं, दो एकड़ खेत है। महंगे दाम पर खाद खरीदा तो कर्ज़ चढ़ जाएगा। अगर खाद नहीं डाले तो फसल ही नहीं बचेगी। दोनों तरफ से हम बर्बाद हो रहे हैं।”
सरकार के दावे और हकीकत
राज्य सरकार बार-बार दावा कर रही है कि किसानों को यूरिया खाद सस्ती दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
लेकिन किसानों के अनुसार,
वितरण केंद्रों पर स्टॉक ही नहीं पहुंचता।
खाद की दुकानों पर लंबी कतारें लगती हैं, और कई बार खाली हाथ लौटना पड़ता है।
अंततः किसानों को मजबूरी में काला बाज़ार से खरीदना पड़ता है।
सवालों के घेरे में प्रशासन
किसानों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग की मिलीभगत के बिना इतनी बड़े पैमाने पर कालाबाज़ारी संभव नहीं है।
कृषि मंत्री का गृह क्षेत्र होने के बावजूद यहां हालात बेकाबू होना गंभीर सवाल खड़ा करता है—क्या सरकार किसानों तक खाद पहुंचाने में नाकाम है, या फिर अधिकारी और व्यापारी गठजोड़ कर किसानों की लूट में लगे हैं?
यूरिया खाद की कमी और कालाबाज़ारी ने बलरामपुर जिले के किसानों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। खेती का मौसम शुरू हो चुका है, और यदि समय पर खाद उपलब्ध नहीं हुई तो सीधे तौर पर उत्पादन प्रभावित होगा।
सरकार को तुरंत जांच कर सख्त कार्रवाई करनी होगी, वरना किसानों की नाराज़गी और बढ़ सकती है।




