कांवड़ लेकर 14 किमी पैदल चले श्रद्धालु, तातापानी तपेश्वर धाम में किया भगवान शिव का जलाभिषेक
श्रावण के अंतिम सोमवार को शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, कांवड़ लेकर पहुंचे हजारों श्रद्धालु
श्रावण के अंतिम सोमवार पर शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, कांवड़ लेकर पहुंचे श्रद्धालु
बलरामपुर। श्रावण मास के अंतिम सोमवार को बलरामपुर जिले में भगवान भोलेनाथ की भक्ति का रंग देखने को मिला। जिले के प्रमुख शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कांवड़ियों की टोलियां बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारों के साथ शिवालयों तक पहुंचीं और भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि एवं मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की।
बलरामपुर जिले के प्रसिद्ध तातापानी तपेश्वर धाम सहित जिलेभर के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। सुबह से ही कांवड़िए विभिन्न नदियों और जलस्रोतों से कांवड़ में जल लेकर पैदल शिवालयों की ओर रवाना हुए। कई श्रद्धालुओं ने कई किलोमीटर तक पैदल यात्रा कर भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर जल अर्पित किया।

14 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे तातापानी
रामानुजगंज की कनहर नदी, बलरामपुर की चंनना नदी और सिंदूर-कनहर नदी के संगम से श्रद्धालु कांवड़ में जल लेकर तातापानी तपेश्वर धाम पहुंचे। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु करीब 14 किलोमीटर तक पैदल चलकर मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
कांवड़ियों की टोलियां पूरे रास्ते बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारे लगाते हुए नजर आईं। श्रद्धालुओं के उत्साह और भक्ति से पूरा क्षेत्र शिवमय नजर आया।

तातापानी में जलाभिषेक का विशेष महत्व
श्रद्धालुओं के अनुसार तातापानी तपेश्वर धाम में जलाभिषेक का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस स्थान का संबंध भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास काल से जुड़ा हुआ है। यहां भगवान शिव का स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है, जिसके कारण सावन के महीने में यहां पूजा और जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है।
मंदिर के पुजारी के अनुसार तातापानी में हर वर्ष सावन मेले का आयोजन किया जाता है। सावन के चारों सोमवार को मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु यहां भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।
पुलिस प्रशासन रहा मुस्तैद
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा और यातायात की समुचित व्यवस्था की गई थी। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए पुलिस बल और प्रशासनिक अमला पूरे क्षेत्र में मुस्तैद रहा। मंदिर समिति के सदस्यों के साथ पुलिस प्रशासन के जवान भी आसपास के क्षेत्र में लगातार निगरानी करते नजर आए।
श्रद्धालुओं की आवाजाही, कांवड़ियों की टोलियों और मंदिर परिसर में भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए पुलिसकर्मी तैनात रहे। प्रशासन और मंदिर समिति की व्यवस्थाओं के चलते श्रद्धालुओं को जलाभिषेक और पूजा-अर्चना में किसी तरह की परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा गया।

110 फीट की शिव प्रतिमा और 12 ज्योतिर्लिंगों के प्रतिरूप आकर्षण
तातापानी तपेश्वर धाम में भगवान शंकर की करीब 110 फीट ऊंची प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। मंदिर परिसर में देश के विभिन्न हिस्सों में विराजित 12 ज्योतिर्लिंगों के प्रतिरूप भी स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा प्राचीन शिव मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जिसकी मान्यता भगवान राम के वनवास काल से जुड़ी हुई है।
श्रावण के अंतिम सोमवार को जिलेभर के शिवालयों में दिनभर पूजा-अर्चना और जलाभिषेक का दौर चलता रहा। हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से पूरा बलरामपुर जिला भक्तिमय नजर आया। श्रद्धालुओं की आस्था के साथ पुलिस प्रशासन और मंदिर समिति की बेहतर व्यवस्थाओं ने आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



