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भंवरमाल समिति में गड़बड़ी उजागर – बिना परमिट पिकअप भरकर गया खाद, किसानों को कहा “स्टॉक खत्म”

छोटे किसानों के साथ छलावा: समिति में यूरिया का स्टॉक भरा, फिर भी लौटाए जा रहे किसान

भंवरमाल सेवा सहकारी समिति में खुला खेल – बिना परमिट पिकअप भरकर खाद भेजा गया, पूर्व उपाध्यक्ष ने की पुष्टि

बलरामपुर-रामानुजगंज।
भंवरमाल सेवा सहकारी समिति मर्यादित, प.सं. 484, रामानुजगंज में खाद वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितता का मामला सामने आया है। छोटे किसानों को खाद देने से मना किया जा रहा है, जबकि बिचौलियों को पिकअप भरकर यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है। यही खाद बाद में खुले बाजार में महंगे दामों पर बेची जा रही है।

मौके पर पकड़ा गया खेल

शुक्रवार सुबह करीब 8:00 से 9:00 बजे के बीच समिति केंद्र से दो पिकअप वाहनों में यूरिया खाद लोड किया गया। एक वाहन में खाद पूरी तरह भरा जा चुका था, जबकि दूसरे में लोडिंग जारी थी। जब भंडारगृह में मौजूद युवक से पूछा गया, तो उसने स्वयं स्वीकार किया कि “अंगूठा लग चुका है, लेकिन परमिट अभी नहीं कटा है।”

किसानों को कहा – “यूरिया नहीं है”

छोटे किसानों का आरोप है कि समिति केंद्र में 500 से अधिक बोरी यूरिया खाद स्टॉक में मौजूद है, लेकिन उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि खाद खत्म हो गया है। किसान कहते हैं कि यह स्थिति पहली बार नहीं है, हर बार बड़े किसानों और बिचौलियों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि छोटे किसान दर-दर भटकते हैं।

मजबूरी में बाजार से महंगा खरीद रहे किसान

समिति से खाद न मिलने के कारण छोटे किसान खुले बाजार से शासन द्वारा निर्धारित मूल्य ₹266 की जगह ₹800 से ₹1200 प्रति बोरी की दर पर यूरिया खरीदने को मजबूर हैं। इससे उनकी खेती की लागत कई गुना बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि खाद की इस कालाबाजारी में समिति प्रबंधन की मिलीभगत साफ झलकती है।

ध्यान ने सुनिए वीडियो की आवाज को

पूर्व उपाध्यक्ष ने की पुष्टि

अरविंद दुबे, पूर्व उपाध्यक्ष भंवरमाल समिति एवं पंजीकृत किसान ने भी पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की है। उन्होंने साफ कहा कि छोटे किसानों को समिति से एक भी बोरी खाद उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। इसके उलट बिचौलियों को सीधे पिकअप भरकर खाद दिया जा रहा है, जो बाजार में ऊँचे दामों पर बेचा जा रहा है। “यह सीधा-सीधा छोटे किसानों के साथ धोखा है,” दुबे ने कहा।

पहले भी हो चुकी कार्रवाई

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही जिले में यूरिया की कालाबाजारी का खुलासा हुआ था। बिचौलियों के पास से शासन-निर्धारित दर की खाद कई गुना अधिक दाम पर बेचे जाते पकड़ी गई थी। उस दौरान जिला प्रशासन ने छापामार कार्रवाई कर दुकानों से यूरिया जप्त किया था और अवैध परिवहन को भी रोका था। बावजूद इसके समिति स्तर पर यह खेल थमने का नाम नहीं ले रहा।

बड़ा सवाल

  • जब समिति में 500 से अधिक बोरी यूरिया खाद मौजूद है, तो किसानों को क्यों नहीं दिया जा रहा?
  • बिना परमिट खाद का परिवहन किसके इशारे पर हो रहा है?
  • क्या समिति प्रबंधन की मिलीभगत से यह कालाबाजारी चल रही है?

किसानों की मांग

किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से तत्काल संज्ञान लेकर कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि समिति स्तर पर इस तरह की धांधली पर रोक नहीं लगाई गई तो छोटे किसान और भी संकट में आ जाएंगे।

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