दिव्यांग बालिका की हत्या: चचेरे भाई ने हथौड़े से मारकर की हत्या, 24 घंटे में गिरफ्तार

दिव्यांग बालिका की निर्मम हत्या का आरोपी 24 घंटे में गिरफ्तार, पहले भी जा चुका है हत्या के मामले में जेल
बलरामपुर-रामानुजगंज (छत्तीसगढ़)।
थाना सामरीपाठ क्षेत्र के बिरहोरपाठ गांव में जमीन विवाद ने एक बार फिर खून बहा दिया। इस बार शिकार बनी एक मासूम दिव्यांग बालिका, जिसकी हत्या उसके ही चचेरे ताऊ भाई ने की। पुलिस ने गंभीरता से मामले को लेते हुए 24 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी पहले भी हत्या के मामले में जेल जा चुका है।
घटना की पूरी पृष्ठभूमि
12 जून 2025 को बिरहोरपाठ गांव निवासी देवप्रसाद नगेसिया ने थाना सामरीपाठ में लिखित आवेदन देकर रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके चचेरे भाई रोपना उर्फ विशुनदेव नगेसिया, पिता स्व. चनकू नगेसिया, उम्र लगभग 35 वर्ष ने ज़मीन के पुराने विवाद को लेकर उसकी दिव्यांग बेटी पार्वती नगेसिया पर जानलेवा हमला कर दिया।
आरोपी ने पार्वती को घर के आंगन में अकेला और असहाय देखकर पत्थर तोड़ने वाले भारी हथौड़े से सिर और कनपटी पर वार किया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी ने हथौड़ा पास के ही एक घर के आंगन में फेंक दिया और भागने की कोशिश की।
गवाह को भी बनाया निशाना
घटना के तुरंत बाद जब राजकुमार नगेसिया, जो गांव का ही एक युवक है, ने आरोपी को भागते हुए रोकने का प्रयास किया तो आरोपी ने उस पर भी लकड़ी के डंडे से सिर पर वार कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और वहीं बेहोश होकर गिर पड़ा।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी निरीक्षक विजय प्रताप सिंह के नेतृत्व में टीम ने तत्काल मर्ग क्रमांक 21/2025 धारा 194 भा.न.सु.सं. तथा फिर मुख्य अपराध क्रमांक 25/2025, धारा 332(क), 103(1), 109 भा.न्या.सं. के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की।
इस सनसनीखेज वारदात की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। पुलिस अधीक्षक श्री वैभव बैंकर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री विश्व दीपक त्रिपाठी, और अनुविभागीय अधिकारी पुलिस कुसमी श्री इम्मानुएल लकड़ा के मार्गदर्शन में पुलिस ने विशेष टीम गठित कर आरोपी की तलाश शुरू की।
जंगल में घेराबंदी कर पकड़ा गया आरोपी
पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी वारदात के बाद जंगल की ओर भाग गया था, जहां उसने खुद को छिपा लिया था। लगातार खोजबीन और ग्रामीणों से मिली सूचना के आधार पर टीम ने जंगल में घेराबंदी की और आखिरकार उसे पकड़ने में सफलता मिली। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
पहले भी जा चुका है हत्या के मामले में जेल
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी आदतन अपराधी है और पहले भी एक अन्य हत्या के मामले में जेल की सजा काट चुका है। इससे यह साफ होता है कि आरोपी समाज के लिए एक स्थायी खतरा बन चुका था।
टीम का योगदान
इस पूरे ऑपरेशन में थाना प्रभारी के साथ प्रधान आरक्षक संदीप बागीस, आरक्षक चन्द्रसेन राजपूत, श्रवण कुमार, अजय कुमार, अनिल साहू और महिला आरक्षक नमिता किण्डो की भूमिका सराहनीय रही। टीम की सतर्कता, तेजी और समर्पण से एक जघन्य अपराध को जल्दी सुलझाया गया।
सामाजिक आक्रोश और संवेदना
इस हृदयविदारक घटना से गांव में शोक और आक्रोश दोनों है। दिव्यांग बालिका की नृशंस हत्या से लोग स्तब्ध हैं और आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं। यह घटना दिव्यांगजनों की सुरक्षा और समाज में व्याप्त हिंसा पर गहरे सवाल खड़े करती है।




