केसीसी ऋण विवाद पर पांच दिन बाद थमा किसानों का आंदोलन, प्रशासन के आश्वासन पर समाप्त हुई भूख हड़ताल

रामानुजगंज। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण और धान खरीदी की लंबित भुगतान राशि को लेकर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रामानुजगंज के सामने पिछले पांच दिनों से चल रहा किसानों का आंदोलन फिलहाल स्थगित हो गया है। प्रशासन की ओर से 23 जून तक मामले के समाधान का भरोसा दिए जाने के बाद आंदोलनरत किसानों ने अपना धरना और क्रमिक भूख हड़ताल समाप्त कर दी। हालांकि किसान नेताओं ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि तय समय सीमा के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और अधिक व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।

किसान नेता नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान पिछले पांच दिनों से बैंक परिसर के बाहर धरने पर बैठे हुए थे। किसानों का आरोप है कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना उनके नाम पर केसीसी ऋण दर्ज कर दिया गया है। इसके कारण धान बिक्री के बदले मिलने वाली भुगतान राशि रोक दी गई है, जिससे अनेक किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि भुगतान नहीं मिलने से उनके सामने खेती-किसानी के साथ-साथ पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने का भी संकट खड़ा हो गया है।
आंदोलन के दौरान किसानों ने लगातार प्रदर्शन कर प्रशासन और बैंक प्रबंधन का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। आंदोलन के चौथे दिन स्थिति तब और गंभीर हो गई जब किसानों ने क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी। पांच किसानों ने अनिश्चितकालीन उपवास रखकर अपनी मांगों के समर्थन में संघर्ष तेज कर दिया। भूख हड़ताल के चलते प्रशासन पर दबाव बढ़ा और आंदोलन जिलेभर में चर्चा का विषय बन गया।

इस आंदोलन को विभिन्न किसान संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों का भी समर्थन मिला। धरना स्थल पर पहुंचकर किसान कांग्रेस के जिला महामंत्री अरविंद दुबे, कमाल अहमद, संतोष यादव, विकास दुबे और डॉ. दिनेश यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने किसानों की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर किसानों को जल्द राहत देने की मांग की।
आंदोलन के दौरान किसानों ने कई गंभीर आरोप भी लगाए। किसानों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें मृत व्यक्तियों तथा जेल में बंद लोगों के नाम पर भी केसीसी ऋण दर्ज होने की जानकारी मिली है। किसानों ने इसे बैंकिंग व्यवस्था में बड़ी अनियमितता बताते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने भी किसानों से दूरभाष पर चर्चा की। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और शिकायतों की जांच उच्च स्तर पर कराई जा रही है। कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश के अन्य जिलों से भी इसी प्रकार की शिकायतें सामने आई हैं, जिनकी जांच की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और किसी भी निर्दोष किसान के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

आंदोलन के पांचवें दिन कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देश पर एसडीएम आनंद नेताम धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने आंदोलनरत किसानों और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत चर्चा की। एसडीएम ने किसानों को आश्वस्त किया कि प्रशासन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए गंभीरता से प्रयास कर रहा है तथा 23 जून तक किसानों के हित में ठोस निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा।
प्रशासन के आश्वासन के बाद एसडीएम आनंद नेताम ने आंदोलनरत किसानों को जूस पिलाकर क्रमिक भूख हड़ताल समाप्त कराई। इसके साथ ही पांच दिनों से जारी धरना प्रदर्शन भी समाप्त हो गया। हालांकि किसानों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन समाप्त नहीं बल्कि केवल स्थगित किया गया है।

किसान नेता नरेंद्र सिंह ने कहा कि किसानों का संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि यदि 23 जून तक प्रशासन की ओर से संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई और किसानों की लंबित भुगतान राशि जारी नहीं हुई तो किसान पुनः आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगला आंदोलन पहले से अधिक व्यापक और प्रभावी होगा।
पिछले पांच दिनों से यह आंदोलन पूरे जिले में चर्चा का विषय बना रहा। किसानों के आरोपों और प्रशासन के आश्वासनों के बीच अब सभी की निगाहें 23 जून पर टिकी हैं। किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्याओं का समाधान करेगा, जबकि आम जनता भी इस बहुचर्चित मामले में होने वाले निर्णय का इंतजार कर रही है।


