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रामचंद्रपुर क्षेत्र के ग्राम लिबरा में पोकलेन मशीनों से हो रहा अवैध खनन, यूपी-बिहार तक भेजी जा रही रेत

ANAND MISHRA OFFICIAL PRESENTS

पांगन नदी में अवैध रेत उत्खनन का खेल जारी, प्रशासनिक मौन से ग्रामीणों में आक्रोश


बलरामपुर-रामानुजगंज, 24 मई 2026।
जिले के विकासखंड रामचंद्रपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत पचावल के बाद अब ग्राम लिबरा, ग्राम पंचायत धौली के खसरा नंबर 36 स्थित पांगन नदी में बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां खुलेआम नियमों की अनदेखी करते हुए पोकलेन मशीनों से नदी से रेत निकाली जा रही है, जबकि जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय मौन साधे हुए हैं।


ग्रामीणों के अनुसार रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें प्रशासन का कोई भय नहीं रह गया है। दिन-रात नदी के बीचों-बीच भारी मशीनें चलाकर रेत निकाली जा रही है। अवैध रूप से निकाली गई रेत को ट्रकों और हाइवा वाहनों के माध्यम से उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड तक भेजा जा रहा है। इससे शासन को प्रतिदिन लाखों रुपए के राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले नदी से सीमित मात्रा में हाथों से रेत निकाली जाती थी, लेकिन अब बड़े पैमाने पर मशीनों से उत्खनन हो रहा है। नदी के बीच गहरे गड्ढे बन चुके हैं, जिससे बरसात के दौरान जल प्रवाह प्रभावित होने और हादसों की संभावना बढ़ गई है। ग्रामीणों को डर है कि यदि इसी तरह खनन जारी रहा तो आने वाले समय में पांगन नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।


ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन को लिखित शिकायत दी है। शिकायतों में अवैध खनन में लगे वाहनों, मशीनों और रेत भंडारण की जानकारी भी दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में भारी नाराजगी है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खनिज विभाग की निष्क्रियता के कारण रेत माफियाओं को खुला संरक्षण मिल रहा है। दिनदहाड़े नदी से रेत निकालकर ट्रकों में भरकर बाहर भेजा जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। लोगों ने सवाल उठाया कि बिना विभागीय जानकारी के इतनी बड़ी मात्रा में रेत परिवहन आखिर कैसे संभव है।


अवैध उत्खनन का असर अब पर्यावरण और ग्रामीण जीवन पर भी दिखाई देने लगा है। नदी किनारे की जमीन कटाव का शिकार हो रही है, वहीं भारी वाहनों की आवाजाही से गांव की सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। रातभर ट्रकों के संचालन से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कुछ ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अवैध रेत कारोबार से जुड़े लोग काफी प्रभावशाली हैं, जिसके कारण लोग खुलकर विरोध करने से डरते हैं। बावजूद इसके ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।


गौरतलब है कि हाल ही में ग्राम पंचायत पचावल में प्रशासन ने अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए मशीन और ट्रक जब्त किए थे। उस कार्रवाई के बाद ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि जिलेभर में अवैध खनन के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा, लेकिन लिबरा क्षेत्र में अब भी धड़ल्ले से अवैध उत्खनन जारी है।


ग्रामीणों ने नवपदस्थ कलेक्टर से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन उच्च स्तरीय जांच कराए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे तो अवैध खनन पर रोक लगाई जा सकती है। ग्रामीणों ने अवैध उत्खनन में लगे पोकलेन मशीन, ट्रक और हाइवा वाहनों को जब्त कर संबंधित लोगों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अवैध रेत उत्खनन केवल राजस्व चोरी का मामला नहीं, बल्कि पर्यावरण विनाश का गंभीर विषय है। लगातार नदी से रेत निकाले जाने से भूजल स्तर प्रभावित होता है और जैव विविधता को भी नुकसान पहुंचता है। यदि समय रहते प्रशासन नहीं चेता तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।


अब देखना होगा कि ग्रामीणों की शिकायतों और बढ़ते जनआक्रोश के बाद जिला प्रशासन और खनिज विभाग क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल पांगन नदी में अवैध रेत उत्खनन का खेल बदस्तूर जारी है और ग्रामीण कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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