छत्तीसगढ़मनेन्द्रगढ़

क्रिसमस पर स्कूली बच्चों ने दिया ईशा मसीह के संदेश,विभिन्न कार्यक्रम का हुआ आयोजन

शीतल हवा में घुली खुशियों की सुगंध और लाल रंग की चमकदार लहरों ने मनेंद्रगढ़ शहर के मानक शैक्षणिक संस्थान दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल को एक बार फिर उत्सवमय स्वप्नलोक में बदल दिया। क्रिसमस के पावन पर्व और रेड कलर डे के संयुक्त आयोजन ने विद्यालय परिसर को प्रकाशमय कर दिया, जहाँ बाल-मन की मासूमियत ने ईसा मसीह के संदेश को जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम का प्रारंभ विशेष प्रार्थना सभा के द्वारा किया गया सर्वप्रथम कक्षा चौथी एकलव्य के छात्र -छात्राओं द्वारा सुमधुर मंगल गान प्रस्तुत किया गया तत्पश्चात् इस विशेष पर्व की महत्ता पर विद्यालय की शिक्षिका अलवीना तथा शिक्षक राम ए टोप्पो द्वारा प्रकाश डालते हुए बताया गया कि यह पावन पर्व प्रभु ईसा मसीह (यीशु मसीह) के जन्म की याद में मनाया जाने वाला एक पवित्र पर्व है। ईसा मसीह को ईसाई धर्म का संस्थापक माना जाता है। उनका जन्म प्रेम, करुणा, शांति और मानवता की सेवा का संदेश देता है।

क्रिसमस हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन ईसा मसीह का जन्म बेथलेहम में हुआ था। उनका जीवन हमें सिखाता है कि हमें एक-दूसरे से प्रेम करना चाहिए, जरूरतमंदों की सहायता करनी चाहिए और क्षमा व दया का मार्ग अपनाना चाहिए। इसी क्रम में कक्षा छ्ठवीं के छात्राओंं द्वारा गीत जिंगल बेल पर आकर्षक नृत्य की प्रस्तुति दी गई इस शानदार प्रस्तुति के पश्चात विद्यालय के वरिष्ठ कक्षाओं के छात्र-छात्राओं द्वारा एक जीवंत नाट्य प्रस्तुत किया गया जिसका शीर्षक प्रभु यीशु एवम् उनकी सीख पर आधारित रहा।विद्यालय के कक्षा पहली से बारहवीं तक के छात्र – छात्राओं हेतु पॉटलक पार्टी का भी आयोजन किया गया जो विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
इस विशेष अवसर पर प्राचार्य डॉ बसंत कुमार तिवारी ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह पावन पर्व आज हम सब दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल के पवित्र प्रांगण में एकत्रित होकर क्रिसमस के पावन पर्व का उत्सव मना रहे हैं। यह मात्र एक धार्मिक अवसर नहीं, अपितु मानवता के हृदय में प्रेम, क्षमा और शांति की ज्योति प्रज्वलित करने वाला दिव्य संदेश है। ईसा मसीह का जन्म हमें सिखाता है कि सच्ची खुशी बाँटने में है, न कि संचय करने में।क्रिसमस का उत्सव हमारे स्कूल में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विविधता में एकता का प्रतीक बन जाता है। हमारे विद्यालय में विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और पृष्ठभूमियों के बच्चे पढ़ते हैं। लाल रंग की चमक के साथ क्रिसमस ट्री की झिलमिलाहट हमें सिखाती है कि जीवन के हर रंग को अपनाकर ही हम इंद्रधनुषी व्यक्तित्व गढ़ सकते हैं। यह उत्सव बच्चों में सहानुभूति, उदारता और पर्यावरण संरक्षण की भावना जगाता है—जैसे क्रिसमस ट्री हमें हरित धरती की याद दिलाता है। क्रिसमस हमें बताता है कि छोटे-छोटे उपहारों से बड़े बदलाव आते हैं। एक मुस्कान, एक मदद का हाथ—ये ही तो जीवन के सच्चे उपहार हैं। आज के इस तेज़-रफ्तार युग में, जहाँ तनाव और विभेद बढ़ रहे हैं, क्रिसमस हमें भाईचारे का पाठ पढ़ाता है। यह स्कूल जीवन का अभिन्न अंग है, जो आपको न केवल किताबी ज्ञान, बल्कि नैतिक मूल्यों से समृद्ध करता है।

इसी क्रम में आज विद्यालय में प्री प्राइमरी कक्षाओं द्वारा रेड कलर डे बड़े उत्साह और आनंद के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर पूरा विद्यालय लाल रंग की छटा से जगमगा उठा। नन्हे–मुन्ने बच्चे लाल रंग की पोशाक पहनकर विद्यालय पहुँचे, जिससे वातावरण अत्यंत आकर्षक और जीवंत हो गया।
कार्यक्रम की शुरुआत लाल रंग के महत्व पर प्री प्राइमरी शिक्षिकाओं द्वारा संक्षिप्त जानकारी देकर की गई। बच्चों को बताया गया कि लाल रंग ऊर्जा, प्रेम, साहस और उत्साह का प्रतीक होता है। इसके बाद बच्चों ने लाल रंग से संबंधित कविताएँ, गीत और छोटी-छोटी गतिविधियों में भाग लिया। कक्षा-कक्षों को लाल गुब्बारों, चार्ट और फूलों से सजाया गया था। बच्चों ने सेब, टमाटर, स्ट्रॉबेरी, गुलाब जैसे लाल रंग की वस्तुओं को पहचानने और उनके नाम बताने की गतिविधि में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इससे बच्चों में रंगों की पहचान के साथ-साथ सीखने की रुचि भी विकसित हुई। विद्यालय की प्री प्राइमरी कक्षाओं की समन्वयक श्रीमती पूनम तिवारी ने कहा कि ऐसे रंग दिवस बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं। इससे बच्चों की रचनात्मकता बढ़ती है और वे खेल-खेल में नई चीजें सीखते हैं। इस प्रकार रेड कलर डे बच्चों के लिए यादगार अनुभव बन गया और पूरे विद्यालय में खुशियों की लालिमा छा गई।
इस विशेष अवसर विद्यालय की निदेशिका श्रीमती पूनम सिंह ने सभी को क्रिसमस के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि यह पर्व प्रेम, शांति, सेवा और भाईचारे का संदेश लेकर आता है। प्रभु यीशु मसीह का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची खुशी दूसरों की मदद करने, क्षमा करने और मानवता की सेवा में निहित है।हमारा विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि संस्कारों और नैतिक मूल्यों का भी माध्यम है। मैं सभी विद्यार्थियों से अपेक्षा करती हूँ कि वे प्रेम, अनुशासन और परिश्रम के साथ आगे बढ़ें तथा समाज में एक जिम्मेदार नागरिक बनें। अभिभावकों और
शिक्षकों के निरंतर सहयोग से ही हम बच्चों का उज्ज्वल भविष्य गढ़ सकते हैं।
कई अविस्मरणीय संस्मरण के साथ इस पावन पर्व की समाप्ति राष्ट्रगान के द्वारा की गई।

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