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बलरामपुर में धान खरीदी और परिवहन व्यवस्था में संगठित गड़बड़ी,सरकारी ट्रकों से बिचौलियों तक पहुंच रहा धान

ANAND MISHRA OFFICIAL PRESENTS

बलरामपुर में धान खरीदी और परिवहन व्यवस्था में संगठित गड़बड़ी,सरकारी ट्रकों से बिचौलियों तक पहुंच रहा धान, राइस मिलरों की भूमिका संदिग्ध


बलरामपुर जिले में धान खरीदी, परिवहन और भंडारण की पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला प्रशासन द्वारा धान बिचौलियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। समितियों से भंडारण केंद्रों तक सरकारी व्यवस्था के तहत ले जाए जा रहे धान को रास्ते में ही बिचौलियों तक पहुंचाया जा रहा है। इस पूरे खेल के सबूत हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए फोटो और वीडियो के रूप में सामने आए हैं।


समितियों से ही हो रही हेराफेरी


सूत्रों के अनुसार धान की ढुलाई के लिए जिन ट्रकों को अधिकृत किया गया है, उन्हीं ट्रकों के माध्यम से धान का अवैध वितरण किया जा रहा है। ताजा मामला कामेश्वरनगर से भंडारण केंद्र जाने वाले ट्रक से जुड़ा है, जहां रास्ते में ही धान उतारकर बिचौलियों को उपलब्ध कराए जाने का आरोप है। इस घटना के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि गड़बड़ी केवल बाहरी स्तर पर नहीं, बल्कि समिति और परिवहन व्यवस्था के भीतर से भी हो रही है।


“चोर–सिपाही” की कहावत हो रही चरितार्थ


धान बिचौलियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कहने वाला प्रशासन खुद कटघरे में खड़ा नजर आ रहा है। जिन ट्रकों और एजेंसियों को सरकारी जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन्हीं के जरिए अवैध परिवहन किया जाना इस बात की ओर इशारा करता है कि पूरे सिस्टम में मिलीभगत है। यही वजह है कि कार्रवाई कुछ मामलों तक ही सीमित रह जाती है, जबकि असली नेटवर्क अब भी सक्रिय है।


            राइस मिलरों का पुराना खेल


जिले में राइस मिलरों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। सूत्र बताते हैं कि कई मामलों में बिना वास्तविक खरीदी के ही धान को कागजों में दिखाकर खाली रकबे में एंट्री कर दी जाती है। बाद में उसी के आधार पर राइस मिलों में चावल की उपलब्धता दर्शाई जाती है। यह खेल वर्षों से चल रहा है और हर खरीदी सीजन में नए रूप में सामने आता है।


   सीमावर्ती इलाकों से बढ़ी चावल की आवाजाही


बलरामपुर जिला झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमाओं से लगा हुआ है। इन राज्यों से बड़ी मात्रा में चावल लोड ट्रक छत्तीसगढ़ में प्रवेश करते हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन ने आज तक यह गंभीरता से जांच नहीं की कि यह चावल आखिर कहां जाता है। सूत्रों के मुताबिक यह चावल सीधे या घुमावदार रास्तों से जिले की राइस मिलों तक पहुंचाया जाता है।
धान खरीदी और उठाव के दौरान अंतरराज्यीय सीमाओं पर चावल की आवाजाही अचानक बढ़ जाना कई सवाल खड़े करता है। सीमावर्ती नाकों पर किसी भी समय 10 से 20 लोड ट्रक खड़े देखे जा सकते हैं। इन ट्रकों से कथित तौर पर अवैध उगाही भी की जाती है और इसके बाद चावल को छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में भेज दिया जाता है।


         ताजा मामला: जांच में फंसा ट्रक


हाल ही में कामेश्वरनगर से गम्हरिया भंडारण केंद्र जा रहे धान लोड ट्रक को बीच रास्ते में रोका गया। जांच में पाया गया कि ट्रक से बिचौलियों को धान उतारा गया था। इस मामले में बिचौलियों सहित ट्रक चालक को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। यह कार्रवाई प्रशासन की सक्रियता को दिखाती है, लेकिन यह भी साबित करती है कि ऐसी घटनाएं नियमित रूप से हो रही हैं।
जीपीएस सिस्टम पर भी सवाल
सरकारी नियमों के अनुसार धान परिवहन में लगे सभी ट्रकों में जीपीएस सिस्टम अनिवार्य है। इसके बावजूद कई ट्रक समिति से निकलने के बाद तय भंडारण केंद्र या राइस मिल तक नहीं पहुंचते। सवाल यह है कि जीपीएस से निगरानी के बावजूद ट्रकों की वास्तविक लोकेशन और आवाजाही पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती। क्या यह तकनीकी विफलता है या जानबूझकर की जा रही अनदेखी?


          शासन को करोड़ों का नुकसान


इस पूरे खेल का सीधा नुकसान शासन को हो रहा है। अवैध रूप से राइस मिलों तक पहुंच रहा चावल सरकारी रिकॉर्ड से बाहर होता है, जिससे करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान होता है। राइस मिलरों को बिना खरीदी के ही चावल मिल जाता है, जिससे उन्हें लाखों रुपये का फायदा होता है। वहीं दूसरी ओर खरीदी समितियों और परिवहन से जुड़े लोग भी इस खेल में अपना हिस्सा निकाल लेते हैं।


        सरकार के सामने बड़ी चुनौती


अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि छत्तीसगढ़ सरकार इस संगठित गड़बड़ी पर कितनी सख्ती से कार्रवाई करती है। यदि पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई कुछ मामलों तक सीमित नजर आ रही है, लेकिन जिले में चल रहे इस बड़े खेल पर रोक लगाने के लिए व्यापक और पारदर्शी जांच की जरूरत है।

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