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पहली ही बारिश में टूटी साढ़े चार करोड़ की नहर, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

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पहली ही बारिश में बह गई करोड़ों की उम्मीद! साढ़े चार करोड़ की नहर में दरारें, ग्रामीणों ने लगाए भ्रष्टाचार और मिलीभगत के आरोप

बलरामपुर-रामानुजगंज। जिले के ग्राम पंचायत भाला-परेवा में जल संसाधन विभाग द्वारा भाला-गिरवानी नहर परियोजना के तहत लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से निर्मित की जा रही कंक्रीट नहर पहली ही मूसलाधार बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई। निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ था कि नहर में दरारें पड़ने लगीं और बारिश के बाद उसका एक हिस्सा टूट गया। इस घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता, विभागीय निगरानी और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।



ग्रामीणों का कहना है कि जिस नहर से भाला, परेवा और विजयनगर क्षेत्र के सैकड़ों किसानों को सालभर सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद थी, वह पहली ही बारिश का दबाव नहीं झेल सकी। इससे करोड़ों रुपये की इस परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में शुरू से ही भारी अनियमितताएं बरती गईं और मानकों की अनदेखी कर काम कराया गया।

निर्माण के 15 दिन बाद ही पड़ने लगी थीं दरारें

ग्रामीणों के अनुसार, नहर निर्माण कार्य शुरू होने के लगभग 15 दिन बाद ही कंक्रीट में दरारें दिखाई देने लगी थीं। उस समय ही लोगों ने आशंका जताई थी कि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। इसके बावजूद विभाग और ठेकेदार ने शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। पहली ही तेज बारिश के बाद नहर का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे ग्रामीणों की आशंकाएं सही साबित होती दिखाई दे रही हैं।

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गुणवत्ताहीन सामग्री और क्योरिंग में लापरवाही का आरोप

किसान सरवन सोनी, इफ्तेखार खान, विनीत गुप्ता और रामकुमार धुर्वे सहित अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण में मानक गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। उनका कहना है कि सीमेंट, गिट्टी और अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर पहले से सवाल उठाए जा रहे थे। साथ ही कंक्रीट की मजबूती के लिए आवश्यक क्योरिंग (पटाई) भी नियमानुसार नहीं कराई गई, जिससे नहर कमजोर हो गई और पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई।

शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

ग्रामीणों ने बताया कि निर्माण कार्य शुरू होने के समय से ही उन्होंने जल संसाधन विभाग के इंजीनियर, एसडीओ और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार लिखित एवं मौखिक शिकायतें दीं। इसके अलावा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी पूरे मामले से अवगत कराया गया, लेकिन किसी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया गया, जिससे निर्माण कार्य में सुधार नहीं हो सका।

इंजीनियर और तकनीकी कर्मचारियों की अनुपस्थिति पर सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर विभाग के जिम्मेदार इंजीनियर नियमित रूप से निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचते थे। वहीं ठेकेदार के तकनीकी कर्मचारी भी अधिकांश समय मौके से अनुपस्थित रहते थे। ऐसे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निगरानी नहीं हो सकी और कार्य मनमाने ढंग से चलता रहा।

मिलीभगत का आरोप, भ्रष्टाचार की आशंका

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जल संसाधन विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी ठेकेदार के साथ मिलीभगत कर निर्माण कार्य में अनियमितताओं को नजरअंदाज करते रहे। उनका कहना है कि साढ़े चार करोड़ रुपये की इस परियोजना में केवल लीपापोती कर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। पहली ही बारिश में नहर के क्षतिग्रस्त होने को ग्रामीण निर्माण में हुई लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष उदाहरण बता रहे हैं।

किसानों की उम्मीदों को लगा झटका

भाला, परेवा और विजयनगर क्षेत्र के किसानों को उम्मीद थी कि नहर बनने के बाद उन्हें सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा और खेती की लागत कम होगी। लेकिन निर्माण कार्य की मौजूदा स्थिति ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण की गुणवत्ता में सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में पूरी परियोजना बेकार साबित हो सकती है और सरकार का करोड़ों रुपये का निवेश व्यर्थ चला जाएगा।

उच्चस्तरीय तकनीकी जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों और किसानों ने जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए, उपयोग की गई सामग्री की जांच हो तथा दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

अब सभी की निगाहें जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि करोड़ों रुपये की इस महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना में सामने आए गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है।

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