फर्जी मास्टर रोल का खेल! गरीबों के हक का पैसा डकार गए पंचायत के जिम्मेदार

मनरेगा में खुला भ्रष्टाचार का बड़ा खेल! शासकीय कर्मचारियों के नाम पर भरे गए फर्जी मास्टर रोल, सरकारी पैसे की खुली लूट
बलरामपुर, जिले की ग्राम पंचायत चिनीयां में मनरेगा योजना के नाम पर भ्रष्टाचार का घिनौना खेल खेला जा रहा है। यहां शासकीय कर्मचारियों के नाम पर फर्जी मजदूर दिखाकर लाखों रुपये डकार लिए गए हैं। ग्रामीणों ने जब इस घोटाले का भंडाफोड़ किया तो पंचायत के जिम्मेदारों के चेहरे उतर गए।
सरकारी नौकरी और मनरेगा मजदूरी… एक साथ!
क्या एक व्यक्ति एक ही समय में दो जगह काम कर सकता है? ग्राम पंचायत चिनीयां में तो ऐसा ही चमत्कार हुआ है! गुरदयाल सिंह, जो कि रामानुजगंज परिवहन चेकपोस्ट में पदस्थ हैं, उनके नाम पर मनरेगा में सैकड़ों दिनों की हाजिरी भर दी गई। इतना ही नहीं, वन विभाग के चौकीदार धर्मेन्द्र यादव को भी मनरेगा मजदूर बना दिया गया — वो भी बिना एक दिन काम किए!

80% फर्जी हाजिरी का आरोप, ग्राम पंचायत में मची खलबली
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि लामीपारा में बन रहे मिट्टी बांध कार्य में 80 प्रतिशत हाजिरी फर्जी है। रोजगार सहायक सुदामा यादव, पंचायत सचिव और सरपंच की तिकड़ी ने मिलकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है। मजदूरी की रकम सीधे इन अफसरों की जेब में चली गई, और गरीब मजदूरों को उनके हक से वंचित कर दिया गया।
पहले भी हुई थी शिकायत… जांच में लीपापोती!
यह पहली बार नहीं है जब इस पंचायत में अनियमितता की शिकायत हुई हो। ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी शिकायत की गई थी, लेकिन जांच अधिकारियों ने मामले को दबा दिया। अब सवाल ये उठता है — आखिर ये जांच अधिकारी किसके दबाव में काम कर रहे हैं?

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, जनदर्शन में की कलेक्टर से शिकायत
गांव के जागरूक नागरिक गोरखनाथ, विनोद भादन, राधेश्याम, हल्देव सिंह और विनोद यादव ने जनदर्शन में पहुंचकर कलेक्टर को दस्तावेजों सहित आवेदन सौंपा। मास्टर रोल की छायाप्रति प्रस्तुत कर उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि यह महज आरोप नहीं, बल्कि एक बड़ा सच है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
प्रशासन की अग्निपरीक्षा शुरू
कलेक्टर ने तत्काल मामले को जिला परियोजना अधिकारी संजय यादव को जांच के लिए सौंपा है। लेकिन अब जनता जानना चाहती है —
क्या होगी सच्चाई की जीत?
या फिर एक और भ्रष्टाचार की फाइल ‘नोट शीट’ में दफन हो जाएगी?
अब समय है जवाबदेही का।
अगर इस बार भी दोषियों को बख्श दिया गया, तो यह संकेत होगा कि मनरेगा जैसी जनहितकारी योजना, भ्रष्टाचारियों की कमाई का जरिया बनकर रह गई है।




