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चाकी पंचायत में प्रधानमंत्री आवास की राशि में कथित गड़बड़ी, 27 हितग्राहियों के पैसे दूसरे खातों में पहुंचने का आरोप

चाकी पंचायत में प्रधानमंत्री आवास की राशि में कथित खेल! 27 हितग्राहियों के पैसे दूसरे खातों में पहुंचने का आरोप

आवास मित्र सहित सरपंच-सचिव की भूमिका पर उठे सवाल, दूसरे शहरों में रहने वालों के खातों में भी राशि ट्रांसफर होने की शिकायत; ग्रामीण बोले- गहराई से जांच हुई तो बढ़ सकती है हितग्राहियों की संख्या

रामचंद्रपुर/बलरामपुर। जनपद पंचायत रामचंद्रपुर की ग्राम पंचायत चाकी में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की राशि को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गरीब हितग्राहियों के लिए स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास की राशि उनके खातों में पहुंचने के बजाय कथित रूप से अन्य व्यक्तियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई और बाद में राशि का आहरण भी कर लिया गया। मामले में आवास मित्र सहित सरपंच और सचिव की भूमिका पर ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि मामला केवल एक-दो हितग्राहियों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, करीब 27 हितग्राहियों के आवास से संबंधित राशि दूसरे खातों में जाने और उसके आहरण की शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि यदि पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के सभी हितग्राहियों के भुगतान की बारीकी से जांच की जाए तो ऐसे और भी मामले सामने आ सकते हैं।

हितग्राही के नाम स्वीकृत राशि, खाते में पहुंची किसी और की

ग्रामीणों के आरोप के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राही को मिलने वाली करीब 1 लाख 20 हजार रुपये की राशि और मनरेगा के तहत मिलने वाली करीब 24 हजार रुपये की राशि कुछ मामलों में सीधे हितग्राही के बैंक खाते में पहुंचने के बजाय अन्य व्यक्तियों के खातों में ट्रांसफर कराई गई।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिन खातों में राशि पहुंची, वहां से उसका आहरण भी कर लिया गया। ऐसे में जिन गरीब परिवारों के लिए सरकार ने आवास निर्माण के लिए राशि स्वीकृत की थी, वे अपने आवास को पूरा कराने के लिए परेशान हैं।

ग्रामीणों ने यह सवाल उठाया है कि यदि भुगतान वास्तव में किसी अन्य व्यक्ति के खाते में हुआ है तो इसके पीछे किस स्तर पर प्रक्रिया अपनाई गई और संबंधित भुगतान को स्वीकृति किसने दी। इन सवालों का जवाब बैंक रिकॉर्ड और सरकारी भुगतान विवरण की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

दूसरे शहरों में रहने वाले लोगों के खातों में भी राशि जाने का आरोप

मामले को और गंभीर बनाता है ग्रामीणों का यह दावा कि पंचायत के कुछ प्रधानमंत्री आवास हितग्राहियों की राशि कथित रूप से दूसरे शहरों में रहने वाले व्यक्तियों के बैंक खातों में भी पहुंची है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति चाकी पंचायत का वास्तविक आवास हितग्राही है, तो उसके नाम स्वीकृत सरकारी राशि किसी ऐसे व्यक्ति के खाते में क्यों पहुंची जो दूसरे शहर में रहता है? ग्रामीणों ने संबंधित खाताधारकों की पहचान, हितग्राहियों से उनके संबंध और भुगतान की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।

उनका कहना है कि केवल पंचायत स्तर के दस्तावेजों की जांच पर्याप्त नहीं होगी। बैंक स्टेटमेंट, भुगतान आदेश, ऑनलाइन भुगतान रिकॉर्ड और राशि के आहरण से संबंधित दस्तावेजों का मिलान कराया जाना चाहिए।

27 मामलों के बाद भी बढ़ सकती है संख्या

ग्रामीणों के मुताबिक अभी करीब 27 हितग्राहियों के मामले सामने आए हैं, लेकिन यह अंतिम संख्या नहीं है। उनका कहना है कि पंचायत के सभी प्रधानमंत्री आवासों का रिकॉर्ड खंगालने पर ऐसे और भी हितग्राही मिल सकते हैं जिनकी आवास की राशि उनके खाते में जाने के बजाय किसी अन्य खाते में पहुंची और वहां से निकाल ली गई।

ग्रामीणों की मांग है कि वर्षवार और हितग्राहीवार प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची निकालकर प्रत्येक हितग्राही के नाम स्वीकृत राशि का सत्यापन किया जाए। इसके बाद यह देखा जाए कि भुगतान किस खाते में गया और राशि निकालने वाला व्यक्ति कौन था।

यदि सरकारी रिकॉर्ड और बैंक खातों के बीच अंतर मिलता है तो प्रत्येक मामले में जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

मनरेगा की राशि की भी जांच की मांग

शिकायत में प्रधानमंत्री आवास के साथ मनरेगा की राशि को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार करीब 24 हजार रुपये की मनरेगा राशि भी कुछ हितग्राहियों के खाते में न जाकर कथित रूप से अन्य खातों में पहुंचाई गई।

ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ मनरेगा भुगतान की भी अलग से जांच की जाए। मजदूरी भुगतान किसके नाम स्वीकृत हुआ, किस खाते में गया और उसका आहरण किसने किया, इसकी जानकारी सार्वजनिक जांच के माध्यम से सामने लाई जाए।

जनपद पंचायत में जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे मामले की शिकायत पहले जनपद पंचायत रामचंद्रपुर में की गई थी। उनके अनुसार मामले में जांच भी कराई गई, लेकिन जांच के बाद ऐसी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई जिससे हितग्राहियों को उनकी राशि वापस मिल सके या जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होती दिखाई दे।

इसके बाद ग्रामीणों ने मामले को जिला पंचायत बलरामपुर और कलेक्टर के समक्ष भी लिखित शिकायत एवं ज्ञापन के माध्यम से उठाया।

ग्रामीणों ने जनदर्शन में भी कलेक्टर से शिकायत कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि कई स्तरों पर शिकायत करने के बावजूद अभी तक उन्हें ठोस परिणाम नहीं मिला है।

कृषि मंत्री के सामने भी पहुंचा था मामला

मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ग्रामीणों ने कुछ दिन पहले बलरामपुर जिले के प्रवास के दौरान स्थानीय विधायक एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम के समक्ष भी प्रधानमंत्री आवास की राशि में कथित गड़बड़ी की शिकायत की थी।

ग्रामीणों के अनुसार, रामचंद्रपुर ब्लॉक कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जब उनके सामने गरीब हितग्राहियों की आवास राशि से जुड़ी शिकायत रखी गई तो मंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई और कड़ी फटकार लगाई।

ग्रामीणों का कहना है कि मंत्री ने अधिकारियों को यह स्पष्ट संदेश दिया कि गरीबों के लिए मिलने वाली राशि में गड़बड़ी गंभीर मामला है। उनके अनुसार मंत्री ने कहा था कि गरीबों का पैसा खाना सबसे बड़ा पाप है।

ग्रामीणों के मुताबिक मंत्री ने यह भी कहा कि यदि गरीबों को न्याय नहीं दिलाया गया तो एसडीएम, तहसीलदार, जनपद पंचायत सीईओ और जिला पंचायत सीईओ सहित स्वयं उनके पद पर बने रहने पर भी सवाल खड़ा होगा।

मंत्री की नाराजगी के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि मामले में तेजी से जांच और कार्रवाई होगी। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद अभी तक उन्हें अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।

आखिर किन खातों में पहुंची सरकारी राशि?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों के नाम जारी राशि यदि वास्तव में दूसरे व्यक्तियों के खातों में गई है, तो वे खाते किसके हैं?

क्या ये खाते संबंधित हितग्राहियों के परिवार या रिश्तेदारों के हैं? क्या संबंधित खाताधारकों को राशि ट्रांसफर करने की अनुमति हितग्राही ने दी थी? भुगतान प्रक्रिया में बैंक खाते किस स्तर पर बदले गए? और सबसे अहम, दूसरे खातों में पहुंची राशि का आहरण किसने किया?

इन सवालों का जवाब केवल दस्तावेजी और बैंकिंग जांच से ही सामने आ सकता है।

पंचायत के सभी आवासों का हो भौतिक सत्यापन

ग्रामीणों ने प्रशासन से केवल बैंक खातों की जांच ही नहीं, बल्कि पंचायत में स्वीकृत सभी प्रधानमंत्री आवासों का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।

उनका कहना है कि प्रत्येक आवास की वर्तमान स्थिति देखी जाए और हितग्राही से पूछताछ की जाए कि उसे कितनी राशि मिली, कब मिली और किस खाते में मिली। यदि आवास अधूरा है तो उसकी वजह भी दर्ज की जाए।

इसके साथ ही सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज आवास की प्रगति और मौके पर मौजूद निर्माण की स्थिति का मिलान किया जाए। इससे यह भी पता चल सकता है कि जिस आवास के नाम पर राशि जारी की गई, उस राशि का उपयोग वास्तव में आवास निर्माण में हुआ या नहीं।

निष्पक्ष जांच से सामने आ सकता है पूरा सच

ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी निर्दोष व्यक्ति को दोषी ठहराने की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच चाहते हैं। यदि आरोप गलत हैं तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और यदि गड़बड़ी हुई है तो दोषियों की जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।

ग्रामीणों का विशेष रूप से कहना है कि जांच का दायरा केवल शिकायत में सामने आए 27 हितग्राहियों तक सीमित नहीं होना चाहिए। चाकी पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के सभी हितग्राहियों के भुगतान की जांच होनी चाहिए।

उनका दावा है कि बारीकी से जांच की गई तो ऐसे और भी हितग्राही सामने आ सकते हैं जिनके आवास की राशि किसी दूसरे व्यक्ति के खाते में पहुंच चुकी है और उसका आहरण भी हो चुका है।

राशि वापस मिले तो पूरे हो सकेंगे अधूरे आवास

प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि किसी हितग्राही के नाम स्वीकृत राशि उसके खाते में न पहुंचकर किसी अन्य खाते में चली गई हो और उसका आहरण भी हो गया हो, तो संबंधित परिवार के सामने आवास पूरा कराने का संकट खड़ा होना स्वाभाविक है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच में यदि राशि के गलत अंतरण और आहरण की पुष्टि होती है तो हितग्राहियों की राशि वापस दिलाई जाए, अधूरे आवासों को पूरा कराया जाए और योजना की राशि में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

अब प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें

चाकी पंचायत के इस मामले में ग्रामीणों की शिकायत, जनपद स्तर पर हुई कथित जांच, जिला प्रशासन को दिए गए ज्ञापन और जनदर्शन में उठाई गई मांग के बाद अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि क्या प्रशासन पंचायत के सभी प्रधानमंत्री आवास हितग्राहियों के बैंक खातों, भुगतान रिकॉर्ड, ऑनलाइन प्रविष्टियों और आहरण की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराता है। यदि व्यापक जांच होती है तो ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में कितने हितग्राहियों की राशि दूसरे खातों में गई, कितनी राशि का आहरण हुआ और इस पूरी प्रक्रिया में किसकी भूमिका रहीं है।

जनपद पंचायत रामचंद्रपुर के सीईओ रणवीर साय ने फोन पर जानकारी देते हुए बताया कि पीएम आवास योजना से संबंधित मामले की जांच की जा चुकी है। जांच रिपोर्ट तैयार कर उच्च कार्यालय को भेज दी गई है।

फिलहाल ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है—मामले की गहराई से जांच हो, गरीब हितग्राहियों की राशि वापस मिले और यदि किसी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार प्रमाणित होता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

 

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