राजपुर में 1.62 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितता की जांच अधूरी, नए आदेश से उठे सवाल

राजपुर में 1.62 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितता की जांच अधूरी, नए आदेश से उठे सवा
एजी ऑडिट में आपत्ति की चर्चा, विभागीय जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं; कार्यमुक्त अधिकारी के बाद भी आदेश में सीएचसी राजपुर का उल्ले
सूरजपुर/राजपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) राजपुर में आयुष्मान भारत योजना की राशि के उपयोग को लेकर सामने आई करीब 1 करोड़ 62 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। इसी बीच जिला चिकित्सालय से जुड़े एक नए प्रशासनिक आदेश ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्टों में मामले को लेकर एजी ऑडिट में आपत्ति दर्ज होने की बात कही जा रही है, लेकिन विभागीय जांच की वर्तमान स्थिति और अब तक हुई कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
उपलब्ध जानकारी और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कथित अनियमितता का मामला वर्ष 2022 से 2025 के बीच आयुष्मान भारत योजना की राशि से संबंधित खरीद, भुगतान और निर्माण कार्यों से जुड़ा बताया जा रहा है। करीब 1.62 करोड़ रुपये की राशि को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक जांच रिपोर्ट और विभागीय निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं होने के कारण इसे प्रमाणित वित्तीय अनियमितता नहीं माना जा सकता। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।

कार्यमुक्ति के बाद भी आदेश में राजपुर का उल्लेख क्यों?
मामले में सबसे बड़ा सवाल डॉ. रामप्रसाद तिर्की से जुड़े प्रशासनिक आदेश को लेकर उठ रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, डॉ. तिर्की को प्रशासनिक आधार पर सूरजपुर जिले के लिए स्थानांतरित कर राजपुर के प्रभार से कार्यमुक्त किया जा चुका था। इसके बावजूद एक नए आदेश में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर का उल्लेख किए जाने से प्रशासनिक स्थिति को लेकर असमंजस पैदा हो गया है।
सवाल यह है कि जब संबंधित अधिकारी को पुराने प्रभार से कार्यमुक्त किया जा चुका था, तो बाद के आदेश में सीएचसी राजपुर का उल्लेख किस आधार पर किया गया? क्या यह किसी पूर्व आदेश के संदर्भ में है या इसके पीछे कोई अन्य प्रशासनिक प्रक्रिया है? इन सवालों का जवाब संबंधित आदेशों की प्रमाणित प्रतियों और स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही मिल सकता है।
विभाग को कार्यमुक्ति आदेश और नए आदेश की वैधता, उनके उद्देश्य तथा वर्तमान प्रभार की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।

जिला चिकित्सालय की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल
जिला चिकित्सालय में जिलेभर से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे महत्वपूर्ण संस्थान में प्रभार और प्रशासनिक आदेशों को लेकर अस्पष्टता सामने आना चिंता का विषय है। कर्मचारियों के नाम से सामने आए कथित पत्रों की सत्यता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
ऐसी स्थिति में जरूरी है कि प्रभार हस्तांतरण से संबंधित दस्तावेजों, शासन के वैध आदेशों और विवादित पत्रों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि किसी आदेश या पत्र को लेकर भ्रम है, तो विभाग को उसकी वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। इससे अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता बनी रहेगी और अनावश्यक विवादों पर विराम लग सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग को देने होंगे इन सवालों के जवाब
राजपुर में आयुष्मान भारत योजना की राशि से जुड़ा मामला और जिला चिकित्सालय के प्रशासनिक आदेश, दोनों ही स्पष्टता की मांग करते हैं। स्वास्थ्य विभाग को निम्न सवालों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए:
- सीएचसी राजपुर में करीब 1 करोड़ 62 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर एजी ऑडिट में वास्तव में क्या आपत्ति दर्ज की गई है?
- यदि मामले में ऑडिट आपत्ति दर्ज हुई है, तो विभागीय जांच कहां तक पहुंची है और अब तक क्या कार्रवाई की गई है?
- डॉ. रामप्रसाद तिर्की को राजपुर के प्रभार से कार्यमुक्त किए जाने के बाद नए आदेश में सीएचसी राजपुर का उल्लेख किस आधार पर किया गया?
- जिला चिकित्सालय में वर्तमान प्रभार व्यवस्था क्या है और इससे संबंधित कौन-से आधिकारिक आदेश प्रभावी हैं?
- कर्मचारियों के नाम से सामने आए विवादित पत्रों की सत्यता की जांच कराई गई है या नहीं?
जांच और पारदर्शिता से ही दूर होगा असमंजस
आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य पात्र मरीजों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना है। इसलिए योजना की राशि के उपयोग से जुड़े किसी भी सवाल का समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से निराकरण होना चाहिए। साथ ही, प्रशासनिक आदेशों में स्पष्टता बनाए रखना भी विभाग की जिम्मेदारी है।
अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग राजपुर में कथित वित्तीय अनियमितता की जांच की स्थिति, ऑडिट आपत्ति और नए प्रशासनिक आदेश को लेकर कब तक आधिकारिक स्पष्टीकरण देता है। फिलहाल, इन मामलों में स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आने से सवाल बने हुए हैं।


