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उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान में भी खेल! DEO-BEO की मनमानी उजागर

कार्यभार न लेने वाली शिक्षिका को मिला पुरस्कार • पहाड़ चढ़कर पढ़ाने वाले पंकज को सूची से बाहर • अधिकारी अपनी पसंद के नाम ठूंसते रहे, मंत्री-कलेक्टर को नहीं लगी भनक

बलरामपुर
शिक्षक दिवस पर आयोजित जिला स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में जहां मंच पर तालियों की गूंज थी, वहीं अंदरखाने से गंभीर सवाल उठ खड़े हुए। आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों ने चयन प्रक्रिया को मज़ाक बना दिया। नतीजा यह हुआ कि वास्तविक रूप से मेहनत और निष्ठा से काम करने वाले शिक्षक उपेक्षित रह गए और अफसरों की पसंदीदा सूची मंच पर चमकती रही।


              !!चयन प्रक्रिया पर बड़ा सवाल!!


शिक्षा विभाग ने दावा किया कि चयन “निष्पक्ष टीम” द्वारा किया गया। लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती है।

माला तिवारी, जिन्हें शिक्षादूत पुरस्कार से नवाज़ा गया, ने 7 अगस्त 2025 तक अपने विद्यालय में कार्यभार ग्रहण ही नहीं किया था। नियुक्ति आदेश जून में जारी हुआ, पर हाजिरी तक शुरू नहीं हुई थी। इसके बावजूद उनका नाम जिला स्तर की सूची में कैसे पहुँचा? जवाब किसी के पास नहीं।


वहीं बलरामपुर विकासखंड के शिक्षक पंकज एक्का, जो रोजाना 8 किलोमीटर पहाड़ी रास्ता पैदल तय कर बच्चों तक शिक्षा पहुँचाते हैं, किसी सूची में नहीं आए। क्या यह अफसरों की नज़र में “योग्य योगदान” नहीं था?


स्थानीय शिक्षकों का कहना है कि यह पूरा खेल DEO और BEO स्तर पर सेटिंग और पक्षपात का नतीजा है।

                  “पसंद के नामों का खेल”

शिक्षक संघों का आरोप है कि अधिकारियों ने अपने “करीबी और मनपसंद शिक्षकों” के नाम आगे बढ़ाए।
एक शिक्षक नेता ने कहा—

पुरस्कार बांटने की प्रक्रिया योग्यता पर नहीं, रिश्तों और पसंद पर आधारित रही। मेहनती शिक्षक पहाड़ चढ़ते रहें, बाढ़ पार करते रहें, लेकिन मंच पर वही पहुंचे जिनके नाम अफसरों ने पहले से तय कर दिए थे।”


मंत्री और कलेक्टर की उपस्थिति में अधिकारियों ने की हिम्मत वाला

कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार नेताम और कलेक्टर राजेंद्र कटारा मौजूद थे। दोनों ने शिक्षकों की सराहना की, लेकिन चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी पर उजागर होने के बाद क्षेत्र की तेजतर्रा मंत्री राम विचार नेताम और कलेक्टर इस पर क्या संज्ञान लेते हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंच पर बैठे बड़े अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस सेटिंग की का पता नहीं चल पाया और वह सिर्फ मूकदर्शक बने रहे।

           सवालों के घेरे में DEO-BEO

किस आधार पर कार्यभार ग्रहण न करने वाली शिक्षिका को पुरस्कार दिया गया?

क्यों पहाड़ी क्षेत्रों और दुर्गम इलाकों में काम करने वाले समर्पित शिक्षक बाहर कर दिए गए?

क्या चयन कमेटी वास्तव में बनी थी या सबकुछ पहले से तय था?


जवाब कोई नहीं देता, लेकिन आरोप साफ हैं— यह पूरा खेल जिला और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों की मनमानी का नतीजा है।

     सम्मान समारोह या मज़ाक?

21 शिक्षक सम्मानित: 3 ज्ञानदीप, 18 शिक्षादूत

कार्यभार ग्रहण न करने वाली शिक्षिका को भी सम्मान

दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक पंकज जैसे नाम गायब
DEO और BEO पर पक्षपात और सेटिंग के आरोप


शिक्षक सम्मान समारोह का मकसद आदर्श शिक्षकों की पहचान करना था, लेकिन यह कार्यक्रम खुद सवालों के घेरे में आ गया। जिला शिक्षा अधिकारी और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों की भूमिका पर सीधे आरोप हैं कि उन्होंने इस समारोह को “सम्मान” से ज़्यादा “पक्षपात” का मंच बना दिया।

अब देखना यह है कि प्रशासन इन सवालों की जांच करेगा या यह मामला अगले साल तक फिर से तालियों और फोटो सेशन में दब जाएगा।

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