बिना मान्यता चल रहा स्कूल, लाखों की फीस वसूली… फिर भी शिक्षा विभाग खामोश

बिना मान्यता चल रहा था अजीजी पब्लिक स्कूल, जांच में खुली पोल; लाखों की फीस वसूली के बावजूद कार्रवाई नहीं
बलरामपुर-रामानुजगंज।
जिले में निजी स्कूलों की मनमानी और शिक्षा विभाग की उदासीनता का एक गंभीर मामला सामने आया है। विकासखंड कुसमी के ग्राम मदगुरी में संचालित अजीजी पब्लिक स्कूल बिना शासकीय मान्यता के संचालित होता पाया गया है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी की संयुक्त जांच टीम ने स्कूल का निरीक्षण कर विस्तृत प्रतिवेदन जिला शिक्षा कार्यालय को सौंपा था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल खड़े हो गए हैं।

संयुक्त टीम ने किया था निरीक्षण
जानकारी के अनुसार 31 जुलाई 2025 को विकासखंड शिक्षा अधिकारी कुसमी के नेतृत्व में सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी, संकुल प्राचार्य मदगुरी, प्राचार्य भुलसीकला, संकुल समन्वयक मदगुरी-घुटराडीह और शासकीय माध्यमिक शाला मदगुरी की शिक्षिका की संयुक्त टीम ने अजीजी पब्लिक स्कूल मदगुरी का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान विद्यालय के संचालन, मान्यता, भवन, शिक्षकों की योग्यता और फीस से संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई।
जांच के दौरान विद्यालय प्रबंधन से मान्यता से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, लेकिन प्रबंधन कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके अलावा विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में संधारित मान्यता प्राप्त विद्यालयों की सूची में भी इस स्कूल का

नाम दर्ज नहीं पाया गया।
संचालक के द्वारा किया जा रहा संचालन
जांच रिपोर्ट के अनुसार अजीजी पब्लिक स्कूल मदगुरी का संचालन मो. समसुद्दीन अंसारी, निवासी ग्राम भगवतपुर, विकासखंड शंकरगढ़ द्वारा 16 जून 2024 से किया जा रहा है। विद्यालय में लगभग 100 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत पाए गए।
विद्यालय की प्राचार्य अर्पणा भगत ने अपने बयान में बताया कि उन्हें स्कूल की मान्यता के बारे में जानकारी नहीं है और उनकी नियुक्ति संचालक द्वारा की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि विद्यालय में केजी से लेकर कक्षा 6 तक पढ़ाई कराई जा रही है।

असुरक्षित भवन में चल रहा स्कूल
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि विद्यालय मो. असलम के निजी भवन में संचालित किया जा रहा है। यह भवन कच्चा है और उस पर एस्बेस्टस शीट लगी हुई है। भवन में कुल चार से पांच छोटे कमरे हैं, जो बच्चों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त नहीं हैं।
विद्यालय में रोशनी की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं पाई गई। छात्रों के लिए केवल एक ही शौचालय है, जबकि अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था नहीं है। स्कूल मुख्य सड़क के किनारे स्थित है, जिससे वाहनों की आवाजाही के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी खतरा बना रहता है। इसके अलावा विद्यालय में खेल मैदान जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।




मनमानी फीस वसूली का मामला
जांच में यह भी सामने आया कि विद्यालय प्रबंधन अभिभावकों से प्रवेश शुल्क और मासिक शुल्क के नाम पर मनमानी तरीके से राशि वसूल रहा है।
केजी-1 और केजी-2 के लिए प्रवेश शुल्क 1500 रुपये और मासिक शुल्क 450 रुपये
कक्षा 1 से 5 तक प्रवेश शुल्क 1800 रुपये और मासिक शुल्क 550 रुपये
कक्षा 6 के लिए प्रवेश शुल्क 2000 रुपये और मासिक शुल्क 650 रुपये
शुल्क रजिस्टर की जांच में पता चला कि सत्र 2024-25 में पालकों से 3,76,750 रुपये और सत्र 2025-26 में 73,200 रुपये वसूले गए। इस प्रकार कुल 4,49,950 रुपये की राशि विद्यालय प्रबंधन द्वारा अभिभावकों से ली गई।
प्राचार्य के बयान के अनुसार यह पूरी राशि संचालक मो. समसुद्दीन अंसारी के पास जमा कराई जाती है। आश्चर्य की बात यह भी है कि विद्यालय के नाम से किसी भी बैंक में कोई खाता संचालित नहीं किया जा रहा है।



बिना प्रशिक्षित शिक्षकों से पढ़ाई
जांच में यह भी सामने आया कि विद्यालय में पढ़ाने वाले कुछ शिक्षकों के पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं है। प्राचार्य अर्पणा भगत ने बताया कि उन्होंने एमए किया है लेकिन बीएड या डीएड नहीं किया है। वहीं एक शिक्षिका केवल आईटीआई प्रथम वर्ष की छात्रा है और उन्हें भी शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है।
शिक्षिकाओं का वेतन भी बहुत कम पाया गया, जिसमें प्राचार्य को 7000 रुपये, एक शिक्षिका को 4500 रुपये और दूसरी शिक्षिका को 5000 रुपये प्रतिमाह दिया जा रहा है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन
जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि विद्यालय का संचालन निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 तथा स्कूल शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों के विपरीत किया जा रहा है।
चूंकि विद्यालय मान्यता प्राप्त नहीं है, इसलिए यहां पढ़ने वाले छात्रों का यू-डायस पोर्टल में पंजीयन भी नहीं हो पाया है। इसके कारण छात्र कई शासकीय योजनाओं और सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं।

कार्रवाई पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा विस्तृत जांच रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भेजे जाने के बाद भी अब तक इस विद्यालय पर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से विद्यालय को बिना मान्यता संचालित बताया गया है और नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग की चुप्पी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।
प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि खबर सामने आने के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और अवैध रूप से संचालित हो रहे ऐसे विद्यालयों पर क्या कार्रवाई करते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावक अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद में निजी स्कूलों में दाखिला कराते हैं, लेकिन यदि ऐसे विद्यालय बिना मान्यता और नियमों के संचालित होते रहें तो यह न केवल बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।



