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अंतर्राज्यीय हाथी दांत तस्कर गिरोह का भंडाफोड़, जबड़े सहित 3 आरोपी गिरफ्तार

रामानुजगंज, 4 अगस्त। वन्यजीव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (मध्य क्षेत्र) भोपाल, राज्य उड़नदस्ता दल रायपुर और वनमंडल बलरामपुर की संयुक्त टीम ने अंतर्राज्यीय हाथी दांत तस्कर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से हाथी के जबड़े सहित तीन दांत बरामद किए गए हैं। मामले में वन्य प्राणी (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत प्रकरण दर्ज कर तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

वनपरिक्षेत्राधिकारी कार्यालय रामानुजगंज द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन के वनमंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशन एवं वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में संगठित वन अपराधों की रोकथाम के लिए विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में 3 अगस्त को संयुक्त टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि रामानुजगंज स्थित कन्हर नदी के किनारे आमंत्रण धर्मशाला के कमरा नंबर-205 में कुछ लोग हाथी दांत की अवैध तस्करी के उद्देश्य से ठहरे हुए हैं।

सूचना मिलते ही वन विभाग और वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की संयुक्त टीम ने धर्मशाला में दबिश दी। कमरे की तलाशी लेने पर एक बैग से हाथी के जबड़े सहित तीन दांत बरामद किए गए। मौके पर मौजूद तीनों संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान झारखंड के पलामू जिले के नवाबाजार थाना अंतर्गत तुकबेरा निवासी संतोष कुमार विश्वकर्मा (42 वर्ष), तथा छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के रामानुजगंज निवासी अजय कुमार गुप्ता (49 वर्ष) और सतेन्द्र कुमार रजक (50 वर्ष) के रूप में हुई है। तीनों के कब्जे से हाथी के जबड़े के तीन दांत जब्त किए गए हैं।

वन विभाग ने परिसर रक्षक रामानुजगंज की रिपोर्ट पर वन अपराध प्रकरण क्रमांक 21972/11 दिनांक 3 अगस्त 2026 दर्ज किया। प्रारंभिक पूछताछ में तीनों आरोपियों ने वन्यजीव अवशेषों के अवैध कारोबार में संलिप्तता स्वीकार की है। इसके बाद उनके विरुद्ध वन्य प्राणी (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9, 39, 48(क), 50, 51 एवं 52 के तहत कार्रवाई की गई। उल्लेखनीय है कि भारतीय जंगली हाथी अनुसूची-1 में शामिल संरक्षित वन्यजीव है और उसके किसी भी अंग का अवैध व्यापार गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

वन विभाग ने आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रामानुजगंज के न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि मामले की विवेचना जारी है तथा इस अंतर्राज्यीय तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

अनिल सिंह
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वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव तस्करी और संगठित वन अपराधों के विरुद्ध अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा तथा ऐसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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