पढ़ाई छोड़ आंदोलन की राह पर छात्र, शिक्षक नहीं मिलने से DEO के खिलाफ खोला मोर्चा
शिक्षकों की कमी से नाराज छात्रों का फूटा गुस्सा, सड़क पर उतरकर किया प्रदर्शन

शिक्षक की मांग को लेकर सड़क पर उतरे छात्र, जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ खोला मोर्चा
बलरामपुर। जिले की शिक्षा व्यवस्था को लेकर अब विद्यार्थियों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। हायर सेकेंडरी स्कूल मूरकौल में लंबे समय से शिक्षकों की कमी और इसके चलते प्रभावित हो रही पढ़ाई से नाराज छात्रों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विद्यालय में पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग की। पढ़ाई प्रभावित होने से नाराज विद्यार्थियों का कहना है कि शिक्षकों के अभाव का सीधा असर उनकी शिक्षा और भविष्य पर पड़ रहा है।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों में शिक्षा विभाग के प्रति नाराजगी साफ दिखाई दी। छात्रों का आरोप है कि विद्यालय में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए कई बार संबंधित अधिकारियों से मांग की गई, लेकिन उनकी समस्या का अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया। लंबे समय से विषयवार शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों का कहना है कि स्कूल में पढ़ाई के लिए पर्याप्त शिक्षक नहीं होने की स्थिति में पाठ्यक्रम पूरा करना और परीक्षा की तैयारी करना भी मुश्किल हो रहा है।

बार-बार मांग के बावजूद नहीं हुई व्यवस्था
छात्रों के मुताबिक विद्यालय में शिक्षकों की कमी कोई नई समस्या नहीं है। इसे लेकर स्कूल स्तर से लेकर जिला शिक्षा विभाग तक जानकारी पहुंचाई जाती रही है। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से विद्यार्थियों का धैर्य जवाब देने लगा। आखिरकार छात्रों ने पढ़ाई छोड़कर सड़क पर उतरने का निर्णय लिया और प्रदर्शन के माध्यम से अपनी मांग प्रशासन तक पहुंचाई।
छात्रों का कहना है कि वे किसी विवाद के लिए नहीं, बल्कि अपने भविष्य को लेकर सड़क पर उतरे हैं। उनका कहना है कि यदि उन्हें समय पर शिक्षक उपलब्ध नहीं कराए गए तो इसका नुकसान उन्हें आगे चलकर उठाना पड़ेगा। विद्यार्थियों ने शिक्षा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर विद्यालय में शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग की है।
प्राचार्य ने भी विभाग को दी थी जानकारी
बताया जा रहा है कि हायर सेकेंडरी स्कूल मूरकौल के प्राचार्य द्वारा भी विद्यालय में शिक्षकों की कमी और इससे प्रभावित हो रही अध्ययन-अध्यापन व्यवस्था की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को कई बार दी जा चुकी है। विद्यालय प्रबंधन स्तर से समस्या की जानकारी विभाग तक पहुंचने के बावजूद अब तक पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं।
स्कूल में शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में छात्रों का सड़क पर उतरना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि विद्यालय की समस्या अब केवल स्कूल प्रबंधन तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच भी गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।

पढ़ाई छोड़कर सड़क पर उतरने को मजबूर हुए छात्र
छात्रों ने सवाल उठाया कि जब विद्यालय में शिक्षकों की कमी की जानकारी संबंधित अधिकारियों को पहले से है, तो फिर समय रहते शिक्षकों की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा जाता है, लेकिन जब पर्याप्त शिक्षक ही उपलब्ध नहीं होंगे तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिलेगी।
छात्रों का कहना है कि शिक्षा उनके भविष्य की नींव है। स्कूल में नियमित और व्यवस्थित पढ़ाई नहीं होने से उनकी तैयारी कमजोर हो सकती है। खासकर उच्च कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक विषय की नियमित पढ़ाई जरूरी होती है। ऐसे में लंबे समय तक शिक्षकों की कमी बनी रहना उनके लिए चिंता का विषय है।
शासन के दावों पर भी उठे सवाल
एक ओर शासन और शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर मूरकौल हायर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षकों की कमी की स्थिति ने जमीनी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विद्यार्थियों और अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी निजी स्कूलों की तरह पर्याप्त शिक्षक और बेहतर अध्ययन-अध्यापन की सुविधा मिलनी चाहिए। शिक्षकों की कमी जैसी मूलभूत समस्या का लंबे समय तक बने रहना शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है।

अभिभावकों में भी बढ़ी नाराजगी
विद्यालय में शिक्षकों की कमी को लेकर छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों में भी नाराजगी की स्थिति बताई जा रही है। अभिभावकों की चिंता इस बात को लेकर है कि बच्चों की पढ़ाई लगातार प्रभावित होने से उनकी शैक्षणिक प्रगति पर असर पड़ सकता है। अभिभावक चाहते हैं कि शिक्षा विभाग मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द आवश्यक शिक्षकों की व्यवस्था करे, ताकि विद्यालय में पढ़ाई सुचारू रूप से संचालित हो सके।
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
छात्रों के सड़क पर उतरने के बाद जिला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जब विद्यालय के प्राचार्य द्वारा शिक्षकों की कमी की जानकारी विभाग को दी जा रही थी और विद्यार्थियों की ओर से भी शिक्षक उपलब्ध कराने की मांग की जा रही थी, तो अब तक समस्या का समाधान क्यों नहीं किया गया, यह बड़ा सवाल है।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। यदि विभागीय स्तर पर समय रहते समस्या का निराकरण किया जाता तो छात्रों को सड़क पर उतरने की जरूरत नहीं पड़ती।

जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
मूरकौल हायर सेकेंडरी स्कूल के छात्रों का यह प्रदर्शन शिक्षा विभाग के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। छात्रों की मुख्य मांग विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था करना है। विद्यार्थियों का कहना है कि उनकी मांग पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे और तेज किया जा सकता है।
अब देखना होगा कि छात्रों के प्रदर्शन के बाद शिक्षा विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और विद्यालय में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल छात्रों के सड़क पर उतरने से मूरकौल के सरकारी स्कूल में शिक्षा व्यवस्था को लेकर चल रही समस्या सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई है।



